
EVM-VVPAT के मिलान पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?
क्या है खबर?
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के वोटों और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) की सभी पर्चियों के मिलान की मांग वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में करीब 5 घंटे तक सुनवाई हुई।
न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की पीठ ने मामले पर सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रख लिया।
इस दौरान मतदाताओं के निजता के अधिकारी, EVM की प्रक्रिया और छेड़छाड़ जैसे कई मुद्दों पर बहस हुई।
आइए जानते हैं आज कोर्ट में क्या-क्या हुआ।
मामला
क्या है मामला?
दरअसल, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) समेत कई लोगों ने कोर्ट में याचिका दायर कर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए EVM में पड़ने वाले सभी वोटों का सत्यापन VVPAT मशीनों से किए जाने की मांग की है।
फिलहाल हर निर्वाचन क्षेत्र की केवल 5 EVM मशीनों का ही VVPAT से मिलान होता है। ये 5 मशीनें रैंडम तरीके से चुनी जाती हैं। याचिकाकर्ताओं ने 5 की बजाय सभी मशीनों का मिलान करने की मांग की है।
आयोग
EVM से छेड़छाड़ को लेकर क्या बोला चुनाव आयोग?
कोर्ट ने पूछा कि EVM की प्रोग्राम मेमोरी में कोई छेड़छाड़ हो सकती है। इस पर चुनाव आयोग ने कहा, "इसे बदला नहीं जा सकता, यह एक फर्मवेयर है, जो सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के बीच का है। इसे बिल्कुल भी नहीं बदला जा सकता। पहले रेंडम तरीके से EVM का चुनाव करने के बाद मशीनें विधानसभा के स्ट्रॉन्ग रूम में जाती हैं और राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में लॉक किया जाता है।"
छेड़छाड़
चुनाव आयोग बोला- EVM से छेड़छाड़ संभव नहीं
चुनाव आयोग के अधिकारी ने बताया कि 100 प्रतिशत मशीन मॉक पोल से गुजरती हैं, लेकिन प्रत्याशी 5 प्रतिशत की ही खुद जांच करते हैं।
चुनाव आयोग ने कहा, "याचिकाएं सिर्फ आशंका हैं, और कुछ नहीं। VVPAT सिर्फ एक प्रिटिंग मशीन है और चुनाव चिन्ह मशीन में अपलोड किए जाते हैं। कंट्रोल यूनिट में कुछ भी लोड नहीं है। हर एक मशीन में बटन नंबर अलग होता है। EVM अलग मशीनें हैं। इनमें छेड़छाड़ नहीं हो सकती।"
आयोग
EVM निर्माता भी नहीं जानता किस पार्टी को कौन-सा बटन मिलेगा- आयोग
चुनाव आयोग ने कहा, "EVM मशीन का निर्माता भी नहीं जानता है कि कौन-सा बटन किस पार्टी को दिया जा रहा है। उसे नहीं पता होता कि कौन-सी मशीन किस लोकसभा क्षेत्र में भेजी जा रही है। स्ट्रॉन्ग रूम को अकेले कोई नहीं खोल सकता। 100 प्रतिशत मशीनें मॉक टेस्ट से गुजरती हैं। ये प्रक्रिया चुनाव के दिन फिर दोहराई जाती हैं। हर मशीन की सील अलग होती है। मशीन लाई जाती है तो सील नंबर जांचे जा सकते हैं।"
कोर्ट
कोर्ट ने कहा- चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहनी चाहिए
वकील प्रशांत भूषण ने केरल के कासरगोड में मॉक ड्रिल के दौरान EVM में पाई गई अनियमितता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल के दौरान एक अतिरिक्त वोट भाजपा को गया था।
इस पर कोर्ट ने कहा, "यह चुनावी प्रक्रिया है और इसकी पवित्रता बनी रहनी चाहिए और किसी को भी यह आशंका नहीं होनी चाहिए कि जो कुछ अपेक्षित है, वह नहीं किया जा रहा है।"
हालांकि, चुनाव आयोग ने इसे गलत खबर बताया।
मतदाता
मतदाता को VVPAT पर्ची बॉक्स में डालने का अधिकार होना चाहिए- याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता के वकील निजाम पाशा ने कहा, "मतदाता को VVPAT की पर्ची दी जानी चाहिए। यह व्यवस्था होनी चाहिए कि वो इसे खुद बैलट बॉक्स में डाले।"
इस पर न्यायाधीश खन्ना ने सवाल किया कि क्या इससे मतदाता के निजता का अधिकार प्रभावित नहीं होगा। इस पर वकील निजाम पाशा ने दलील दी कि मतदाता की निजता के चलते उसके मत देने का अधिकार को किनारे नहीं किया जा सकता है।