
नागरिकता कानून: सूची भेजने वाला पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश, 40 हजार शरणार्थियों की पहचान हुई
क्या है खबर?
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर काग्रेस सहित विपक्षी पार्टियां विरोध प्रदर्शन करते हुए इसे वापस लेने की मांग कर रही है। इसी बीच गत शुक्रवार को सरकार ने इसे देशभर में लागू करते हुए गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया।
इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी तैयारी शुरू करते हुए नागरिकता देने के लिए राज्य के 19 जिलों में 40,000 शरणार्थियों की पहचान की है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
सबसे ज्यादा संख्या
पीलीभीत में हुई सबसे ज्यादा शरणार्थियों की पहचान
उत्तर प्रदेश में अब तक जिन शरणार्थियों की पहचान की गई है, उनकी सबसे अधिक संख्या 30-35 हजार पीलीभीत जिले में है। यह जिला लखनऊ से करीब 260 किलोमीटर दूर और उत्तरखंड के पास नेपाल की सीमा पर बसा है।
जिले के शीर्ष अधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि बांग्लादेश और पूर्वी पाकिस्तान से आए करीब 35,000 हजार लोगों की पहचान की गई है। प्रारंभिक जांच इनके उत्पीड़न के कारण पीलीभीत में शरण लेने की बात सामने आई है।
जानकारी
इन जिलों में की गई है शरणार्थियों की पहचान
नागरिकता संशोधित काननू के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक आगरा, अमेठी, झांसी, रायबरेली, कानपुर, प्रतापगढ़, सहारनपुर, रामपुर, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बहराइच, लखीमपुर खीरी, मथुरा, वाराणसी, गोरखपुर, अलीगढ़, लखनऊ, मेरठ और पीलीभीत सहित 19 जिलों में लगभग 40,000 गैर-मुस्लिम शरणार्थियों की सूची तैयार की है।
इन सभी जिलों के प्रारम्भिक रिपोर्ट केन्द्र सरकार को भेजी जा चुकी है। सर्वे का काम अभी जारी है।
बयान
अभी मात्र शुरुआत, और बढ़ेगी संख्या- मंत्री
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि सरकार शरणार्थियों की पहचान में जल्दी नहीं कर रही है। अभी इसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। यह एक सतत प्रक्रिया है। इसके तहत शरणार्थियों की संख्या अभी और बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि सभी जिला मजिस्ट्रेटों को सर्वेक्षण करने और शरणार्थियों की अपडेट सूची जारी करने के लिए कहा गया है। इस सूची को केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ भी साझा करने की भी प्रक्रिया चल रही है।
पहला राज्य
उत्तर प्रदेश बना केन्द्र को रिपोर्ट भेजने वाला पहला राज्य
केन्द्र सरकार की ओर से नागरिकता कानून का गजट नोटिफिकेशन जारी करने के साथ ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अब अल्पसंख्यकों का आंकड़ा भी केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजना शुरू कर दिया है।
देश में उत्तर प्रदेश पहला राज्य है जिसने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आकर राज्य में रह रहे हिंदू अल्पसंख्यकों की अनुमानित संख्या गृह मंत्रालय को भेजी है। ऐसे में अब दूसरे राज्य भी जल्द ही रिपोर्ट भेजना शुरू करेंगे।
सबसे ज्यादा हिंसा
CAA को लेकर उत्तर प्रदेश में हुई थी सबसे ज्यादा हिंसा
गौरतलब है कि CAA को लेकर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों में सबसे ज्यादा हिंसक प्रदर्शन और घटनाएं उत्तर प्रदेश में हुई थी। पिछले महीने पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में 21 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
इनमें PFI का नाम उभरकर सामने आया था।
हिंसक विरोध प्रदर्शन के बावजूद भी गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया था कि CAA को वापस नहीं लिया जाएगा।
पृष्ठभूमि
राष्ट्रपति की मुहर के बाद बना था कानून
नागरिकता संशोधन विधेयक 12 दिसंबर को राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद नागरिक संशोधन कानून बन गया था। सरकार के अनुसार इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश में उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी।
कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियां इसका विरोध कर रही है। इन सबके बीच गत 10 जनवरी को सरकार ने इसका गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया।