
महाराष्ट्र: 27 सालों से लंबित था मामला, सुनवाई से पहले ही 108 वर्षीय वृद्ध की मौत
क्या है खबर?
देश के न्यायालयों में लंबित मामलों की फेहरिस्त का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भूमि विवाद के मामले में महाराष्ट्र के एक 108 वर्षीय बुजुर्ग की अपील पहले तो 27 सालों तक बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित रही और अब जब सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई के लिए तैयार हुआ तो इसके लिए वह दुनिया में ही नहीं रहा।
ऐसे में अब उसके कानूनी उत्तराधिकारियों की मौजूदगी में इस मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाया जाएगा।
पृष्ठभूमि
1968 में भूखंड खरीदने के साथ शुरू हुआ था मामला
इंडिया टुडे के अनुसार, मृतक 108 वर्षीय बुजुर्ग सोपान नरसिंग गायकवाड़ है। उसने साल 1968 में पंजीकृत बिक्री करार के तहत जमीन खरीदी थी, लेकिन बाद में पता चला कि उसके मूल मालिक ने जमीन के एवज में बैंक से ऋण लिया है।
जब मूल मालिका ऋण नहीं चुका सका तो बैंक ने गायकवाड़ को संपत्ति कुर्क करने का नोटिस जारी किया।
इस पर गायकवाड़ ने मूल मालिक और बैंक के खिलाफ ट्रायल कोर्ट का रुख किया था।
सुनवाई
1988 से बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित पड़ी रही अपील
गायकवाड़ की शिकायत पर ट्रायल कोर्ट ने 10 सितंबर, 1982 को उनके पक्ष में एक डिक्री जारी कर दी, भूखंड के मालिक ने इसके खिलाफ अपील दायर कर दी।
इस पर लंबी सुनाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने साल 1987 में डिक्री को पलट दिया।
इसके बाद गायकवाड़ ने 1988 में दूसरी अपील में हाई कोर्ट का रुख किया, लेकिन यह करीब 27 साल यानी 2015 तक लंबित पड़ी रही। इसके बाद हाई कोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया।
खारिज
अपील स्थगन की याचिका के बाद हाई कोर्ट ने खारिज की अपील
गायकवाड़ के वकील विक्रम कदम ने बताया कि 19 अगस्त, 2015 को दूसरी अपील स्थगित की गई थी। उसके बाद दोनों वकीलों ने 22 अगस्त, 2015 को बॉम्बे हाईकोर्ट में पेश होकर निर्देश लेने के लिए स्थगन की मांग की।
कोर्ट ने 3 सितंबर, 2015 तक स्थगित कर दिया, लेकिन आखिरकार 23 अक्टूबर, 2015 को अपील को डिफ़ॉल्ट रूप से खारिज कर दिया गया।
इसी तरह कोर्ट ने अपील की बहाली के आवेदन को भी 2019 में खारिज कर दिया।
अपील
गायकवाड़ ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में की अपील
बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ गायकवाड़ ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। उनके वकील ने अनुरोध किया कि अपील में देरी को याचिकाकर्ता के महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाके का होने के संदर्भ में देखा जाए और बताया कि फैसले की जानकारी उसे देरी से मिली और इसके बाद कोरोना महामारी आ गई।
इसके बाद गत 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद उसकी याचिका को स्वीकार कर लिया।
नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने अपील में देरी के लिए दिया नोटिस
मामले में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ ने 23 अक्टूबर 2015 और 13 फरवरी 2019 को हाई कोर्ट के फैसले खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर करने में 1,467 दिनों और 267 दिनों की देरी को माफ करने के लिए दायर आवेदन पर नोटिस जारी किया है।
इसी तरह कोर्ट ने मामले के प्रतिवादियों से भी आठ हफ्ते में जवाब तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने मामले में वरीयता पर नहीं लिया।
टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने यह की टिप्पणी
जस्टिस चंद्रचूड ने कहा, "हम इस तथ्य का संज्ञान ले रहे हैं कि याचिकाकर्ता की उम्र 108 साल है और हाई कोर्ट ने इस मामले को मेरिट के आधार पर नहीं लिया एवं मामले को वकील के अनुपस्थित होने के आधार पर खारिज कर दिया।"
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ग्रामीण इलाके का है और हो सकता है कि वकील वर्ष 2015 के बाद उससे संपर्क नहीं कर सका हो। ऐसे में उसे इस संदेह का लाभ मिलना चाहिए।
मौत
सुप्रीम कोर्ट के अपील स्वीकार करने से पहले हुई वादी की मौत
वकील विराज कदम ने बताया कि दुर्भाग्य से जो व्यक्ति निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक यह मामला लाया वह सुनवाई पर शीर्ष अदालत की सहमति की खबर सुनने के लिए जिंदा नहीं है।
उन्होंने कहा कि 12 जुलाई को अदालत द्वारा मामले पर सुनवाई करने से पहले ही गायकवाड़ की मौत हो गई थी, लेकिन ग्रामीण इलाके से सुनवाई के बाद ही उसके निधन की खबर आई है। अब उनका प्रतिनिधित्व उनके कानूनी उत्तराधिकारी करेंगे।