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गुजरात: पिता ने 25 साल बाद बेटे संग दी 10वीं बोर्ड परीक्षा, दोनों को मिली सफलता
गुजरात बोर्डः पिता-पुत्र ने साथ पास की 10वीं की परीक्षा

गुजरात: पिता ने 25 साल बाद बेटे संग दी 10वीं बोर्ड परीक्षा, दोनों को मिली सफलता

लेखन राशि
May 26, 2023
05:45 pm

क्या है खबर?

गुजरात माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (GSHSEB) ने कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा के परिणाम जारी किए। इन परिणामों में एक पिता-पुत्र की जोड़ी ने कमाल कर दिया। 42 साल के पिता ने 25 साल बाद अपने 16 साल के बेटे के साथ 10वीं की परीक्षा दी और दोनों पास हो गए। पिता ने 45 प्रतिशत और बेटे ने 79 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। आइए जानते हैं पिता-पुत्र की प्रेरणादायक कहानी।

पिता

बेटे के ही स्कूल में चपरासी हैं पिता

अहमदाबाद के रहने वाले वीरभद्र सिंह सिसोदिया डीपी हाई स्कूल में चपरासी का काम करते हैं। उनका बेटा युवराज इसी स्कूल में पढ़ाई करता है।

वीरभद्र के दोबारा पढ़ाई करने के जज्बे से हर कोई प्रेरित हो रहा है।

वीरभद्र ने स्कूल में नौकरी के साथ पढ़ाई की और प्राइवेट विद्यार्थी के रूप में परीक्षा दी।

स्कूल के प्रधानाध्यापक चिराग शाह ने बताया कि स्कूल में इस तरह का ये पहला मामला है।

पिता

बेटे से प्रेरित होकर दी परीक्षा

वीरभद्र ने बताया "परीक्षा देने के लिए बेटा मेरी प्रेरणा था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं 25 साल बाद दोबारा परीक्षा दूंगा। मेरा बेटा 10वीं में पहुंचा तो मैंने सोचा मैं भी कर सकता हूं। मैंने स्कूल से मदद ली और परीक्षा फॉर्म भरा।"

वीरभद्र ने आखिरी बार 10वीं की परीक्षा साल 1998 में राजस्थान के डूंगरपुर में दी थी।

युवराज ने कहा कि पिता के साथ परीक्षा देने का अनुभव बहुत अच्छा रहा।

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पढ़ाई

पिता-पुत्र साथ करते थे पढ़ाई

युवराज ने बताया "हमने एक साथ परीक्षा की तैयारी की और मैंने पिता की दोस्त की तरह मदद की।"

स्कूल के प्रधानाचार्य ने बताया कि युवराज ने प्राइवेट कोचिंग की और उनके पिता ने स्वाध्याय किया। शाम 5:30 बजे के बाद उनकी शिफ्ट खत्म हो जाती थी, तो एक शिक्षक उन्हें पढ़ाते थे। किसी विषय में कठिनाई आने पर उसका हल बताते थे।

वीरभद्र ने स्कूल प्रबंधन को भी अपनी सफलता का श्रेय दिया है।

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स्कूल

आगे भी पढ़ाई करेंगे वीरभद्र

वीरभद्र ने 25 साल के बाद कोई परीक्षा दी और उसे पास भी किया। इससे वो उत्साहित हैं और आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं।

उन्होंने बताया कि स्कूल वालों ने उन्हें समझाया था कि अगर वो आगे पढ़ाई करेंगे और MSc पास कर लेगें तो उन्हें अच्छे अवसर मिलेंगे। बेटे और स्कूल प्रबंधन की प्रेरणा से उन्होंने इस बार परीक्षा फॉर्म भरा।

इस बार गुजरात बोर्ड की परीक्षाएं मार्च में आयोजित हुई थी।

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