
रूसी कोरोना वायरस वैक्सीन: हर सात में से एक व्यक्ति में देखे जा रहे साइड इफेक्ट
क्या है खबर?
तीसरे चरण के ट्रायल के दौरान सामने आए ताजा आकंड़ों ने पहले से ही सवालों के घेरे में चल रही रूस की कोरोना वायरस वैक्सीन पर संदेह के बादलों को और घना कर दिया है। इनमें पाया गया है कि क्लीनिकल ट्रायल में जिन लोगों को स्पूतनिक फाइव' नामक ये वैक्सीन दी जा रही है, उनमें हर सात में से एक में साइड इफेक्ट देखने को मिल रहे हैं।
हालांकि रूसी सरकार ने इन लक्षणों को हल्का बताया है।
बयान
रूस के स्वास्थ्य मंत्री ने खुद दी ताजा आंकड़ों की जानकारी
रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने 'मॉस्को टाइम्स' को दिए गए अपने एक बयान में कहा कि जिन लोगों को ये वैक्सीन दी गई, उनमें से लगभग 14 प्रतिशत में साइड इफेक्ट देखे गए।
उन्होंने कहा कि इन साइड इफेक्ट्स में हल्की कमजोरी, 24 घंटे तक मांसपेशियों में दर्द और शरीर के तापमान में वृद्धि आदि शामिल हैं। हालांकि इन लक्षणों को हल्का बताते हुए उन्होंने कहा कि ये अगले ही दिन गायब हो गए।
रिपोर्ट
ज्यादातर वॉलेंटियर्स में थे हल्के लक्षण, गंभीर लक्षणों की भी आशंका
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रायल के दौरान वॉलेंटियर्स में जो साइड इफेक्ट देखे गए हैं, वे ज्यादातर हल्के हैं और वैक्सीन की डोज दिए जाने के बाद अक्सर ऐसे साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं। वॉलेंटियर्स में जो लक्षण देखे गए हैं उनमें बुखार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द और खटास आदि शामिल हैं।
कुछ विशेषज्ञों ने ट्रायल में आगे बढ़ने पर अधिक गंभीर और अप्रिय लक्षण दिखने की आशंका भी व्यक्त की है।
असर
क्या है इन साइड इफेक्ट्स का मतलब?
रूसी वैक्सीन के ट्रायल के दौरान सामने आए इन साइड इफेक्ट से साफ है कि इसे जल्दबाजी में बड़े पैमाने पर उपयोग नहीं किया जा सकता और जनता में इसके प्रयोग से पहले इसका सुरक्षित और प्रभावी साबित होना जरूरी है।
अभी तक केवल स्वस्थ लोगों पर इस वैक्सीन का ट्रायल हुआ है और इस दौरान सामने ये हल्के साइड इफेक्ट भी इस वैक्सीन को अधिक जोखिम वाले समूहों के लिए अनुपयुक्त बना सकते हैं।
पृष्ठभूमि
पिछले महीने वैक्सीन लॉन्च करने वाला पहला देश बना था रूस
बता दें कि इस वैक्सीन को रूसी सेना ने मॉस्को के गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडिमियोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी के साथ साझेदारी में विकसित किया है और पिछले महीने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे लॉन्च किया था।
पुतिन की बेटी और देश के स्वास्थ्य मंत्री समेत तमाम बड़ी हस्तियों को इस वैक्सीन की डोज दी जा चुकी है और इसके आने वाले कुछ हफ्तों में बड़े पैमाने पर जनता के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद है।
ट्रायल
शुरूआती ट्रायल के बाद ही लॉन्च कर दी गई है वैक्सीन
कॉमन कोल्ड फैलाने वाले एडिनोवायरस के DNA से बनाई गई रूस की इस वैक्सीन का अभी केवल पहले और दूसरे चरण का ट्रायल पूरा हुआ है। दोनों चरणों में 38-38 लोगों को ये वैक्सीन लगाई गई और इन सभी लोगों में कोरोना वायरस के खिलाफ इम्युनिटी देखने को मिली। वैक्सीन के प्रयोग पर गंभीर साइड इफेक्ट भी नहीं देखने को मिले।
वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल इसके प्रयोग के साथ-साथ ही चलता रहेगा।
जानकारी
40,000 लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल करेगा रूस
रूस कई अलग-अलग देशों में 40,000 लोगों पर तीसरे चरण का ट्रायल कर रहा है और अभी तक लगभग 300 लोगों को इसकी डोज दी जा चुकी है। भारत में भी इसका ट्रायल होगा और इसके लिए डॉ रेड्डीज लैब के साथ करार हुआ है।
सवाल
बिना ट्रायल पूरे किए वैक्सीन लॉन्च करने पर सवाल उठा रहे हैं विशेषज्ञ
आमतौर पर किसी भी वैक्सीन को तीसरे चरण का ट्रायल पूरा होने के बाद ही लॉन्च किया जाता है, जिसमें हजारों लोगों को इसकी डोज देकर देखा जाता है कि ये कितनी प्रभावी और सुरक्षित है। वैक्सीन के सुरक्षित न होने पर ये लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
इसी कारण अमेरिका के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फाउची समेत कई विशेषज्ञ बिना ट्रायल पूरे किए वैक्सीन लॉन्च करने के रूस के फैसले पर सवाल उठा चुके हैं।