
नेपाली संसद के निचले सदन ने दी विवादित नक्शे को मंजूरी, भारत ने कहा- मान्य नहीं
क्या है खबर?
नेपाली संसद के निचले सदन ने भारतीय क्षेत्र को नेपाल के हिस्से में दिखाने वाले नए नक्शे से संबंधित संविधान संशोधन बिल को पारित कर दिया है।
बिल को पारित होने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी और 275 सदस्यीय निचले सदन में सभी 258 सांसदों ने इसके समर्थन में वोट किया। बिल के खिलाफ एक भी वोट नहीं पड़ा।
भारत ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि नेपाल का ये दावा ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है।
पृष्ठभूमि
क्या है भारत-नेपाल का सीमा विवाद?
भारत और नेपाल के बीच 1816 की 'सुगौली संधि' के तहत सीमा निर्धारित की गई है, जिसके तहत उत्तराखंड की महाकाली नदी के पश्चिम में स्थित पूरा हिस्सा भारत का है, वहीं पूर्व का हिस्सा नेपाल में आता है।
दोनों देशों में नदी की स्थिति को लेकर विवाद है और भारत इलाके में पड़ने वाले कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को अपना हिस्सा बताता है।
वहीं नेपाल इन तीनों को अपना क्षेत्र बताता है।
मौजूदा विवाद
भारत के लिपुलेख दर्रा तक सड़क बनाने के कारण हुई मौजूदा विवाद की शुरूआत
नेपाल और भारत में कई बार इन इलाकों, खासकर कालापानी, बातचीत हो चुकी है। इस बार के विवाद की शुरूआत भारत के लिपुलेख दर्रा तक एक सड़क बनाने के कारण हुई है।
नेपाल इस सड़क निर्माण का विरोध कर रहा है। पिछले महीने नेपाली कैबिनेट के अपने देश के नए नक्शे को मंजूरी देने से विवाद और बढ़ गया क्योंकि इस नक्शे में कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को नेपाल के हिस्से में दिखाया गया था।
बिल पारित
नेपाली संसद में विपक्षी पार्टियों ने भी किया बिल का समर्थन
शनिवार को नेपाली संसद के निचले सदन (प्रतिनिधा सभा) में इसी नक्शे को मंजूरी देने वाले संविधान संशोधन बिल पर वोटिंग हुई है और सभी पार्टियों ने इसके समर्थन में वोट डाला। विपक्षी पार्टियां पहले ही बिल को समर्थन देने का ऐलान कर चुकी थीं, इसलिए इसका पारित होना महज एक औपचारिकता था।
बिल पर वोटिंग और भाषणों के दौरान नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भी सदन में मौजूद रहे। ओली हाल ही में भारत पर बेहद हमलावर रहे हैं।
प्रतिक्रिया
भारत की प्रतिक्रिया- नेपाल का दावा मान्य नहीं
बिल पारित होने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हमने गौर किया है कि नेपाल की प्रतिनिधि सभा ने नक्शे में बदलाव के लिए संशोधन विधेयक पारित किया है, ताकि वे कुछ भारतीय क्षेत्रों को अपने देश में दिखा सकें। हालांकि हमने इस बारे में पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। यह ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है। ऐसे में उनका दावा मान्य नहीं है।"
जानकारी
बातचीत के समझौता का उल्लंघन- भारत
बता दें कि भारत हमेशा बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझाने का पक्षधर रहा है और श्रीवास्तव के बयान में भी इसकी झलक मिली। उन्होंने कहा कि नेपाल का बिल पारित करना सीमा विवाद पर होने वाली बातचीत के मौजूदा समझौते का उल्लंघन है।
प्रक्रिया
अब आगे क्या?
अब इस बिल को नेपाली संसद के ऊपरी सदन (राष्ट्रीय सभा) में पेश किया जाएगा। सभी सांसदों को बिल में कोई संशोधन सुझाने के लिए 72 घंटे दिए जाएंगे, जिसके बाद वोटिंग होगी।
प्रतिनिधि सभा की तरह राष्ट्रीय सभा से पारित होने के लिए भी बिल को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी।
राष्ट्रीय सभा से पारित होने के बाद बिल राष्ट्रपति के पास जाएगा और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ये नेपाल का आधिकारिक नक्शा बन जाएगा।