
कोविड वैक्सीन: अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम 'कोवैक्स' ने पार किया एक अरब खुराकों की आपूर्ति का पड़ाव
क्या है खबर?
गरीब और विकासशील देशों को मुफ्त में कोविड वैक्सीन प्रदान करने वाले अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम COVAX (कोवैक्स) ने एक अरब खुराकों की आपूर्ति के बड़े पड़ाव को हासिल कर लिया है।
कोवैक्स का प्रबंधन संभालने वाले एक संगठन ने शनिवार को इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी दी।
कार्यक्रम के तहत शुरूआत में बेहद धीमी रफ्तार से वैक्सीनों की आपूर्ति की गई थी, लेकिन पिछली तिमाही में आपूर्ति में बड़ी वृद्धि हुई है। कुल 144 देशों को वैक्सीन भेजी गई हैं।
कार्यक्रम
क्या है कोवैक्स?
कोवैक्स WHO, यूनाइटेड ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन एंड इम्युनाइजेशन (GAVI) और कॉलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशन (CEPI) समेत कई सगंठनों का एक गठबंधन है।
इसका लक्ष्य दुनिया भर में कोरोना वैक्सीन का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना है और इसके जरिए गरीब और विकासशील देशों को मुफ्त में वैक्सीन प्रदान की जाती हैं।
भारत इसका एक अहम हिस्सा है और पिछले एक साल में भारत गरीब देशों को करोड़ों खुराकें भेज चुका है।
लक्ष्य
कोवैक्स ने रखा था 2021 के अंत तक दो अरब खुराकों की आपूर्ति करने का लक्ष्य
2020 में जब कोवैक्स को लॉन्च किया गया, तब इसके जरिए 2021 के अंत तक गरीब देशों को दो अरब खुराकें भेजने का लक्ष्य रखा था।
हालांकि सीमित उत्पादन के बीच अमीर देशों के वैक्सीन की खुराकों को जमा करने, कई देशों को निर्यात पर पाबंदी लगाई और कोवैक्स में हुए बदलावों के कारण खुराकों की आपूर्ति बेहद धीमी रही और दो अरब खुराकों की आपूर्ति के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सका।
बदलाव
कोवैक्स में किस बदलाव से वैक्सीनों की आपूर्ति धीमी हुई?
फरवरी, 2021 में वैक्सीन भेजने की शुरूआत करने वाले कोवैक्स ने शुरू में अपने 10 अरब डॉलर के फंड के जरिए वैक्सीन खरीद कर गरीब देशों को भेजने की योजना बनाई थी, लेकिन अमीर देश उसे खुराकें दान में देने लगे।
अब तक भेजी गईं खुराकों में से लगभग एक-तिहाई अमीर देशों ने दान की थीं और वे चाहते थे कि ये खुराकें उनकी पसंद के देशों में ही भेजी जाएं।
इसी कारण कोवैक्स की आपूर्ति धीमी रही।
असमानता
वैक्सीनेशन में अभी भी भारी असमानता
पिछले तीन महीने में खुराकों का आपूर्ति में तेज उछाल के बावजूद वैक्सीनेशन में असमानता अभी भी बनी हुई है।
WHO के अनुसार, जहां अमीर देशों की 67 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन की दोनों खुराकें लग चुकी हैं और वे अधिक जोखिम वाले समूहों को बूस्टर खुराक भी लगा रहे हैं, वहीं गरीब देशों में मात्र पांच प्रतिशत आबादी को दोनों खुराकें लगी हैं।
40 प्रतिशत वैश्विक आबादी को तो एक भी खुराक नहीं लगी है।