
उत्तर प्रदेश: चुनाव की तैयारियों के बीच एक हफ्ते में 1,300 प्रतिशत बढ़े कोरोना के मामले
क्या है खबर?
विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच उत्तर प्रदेश में एक हफ्ते के अंदर कोरोना वायरस के दैनिक मामलों में 1,300 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखने को मिली है।
राज्य में आज 7,695 नए मामले दर्ज किए गए जो पिछले रविवार को सामने आए 552 मामलों से 13 गुना अधिक हैं। राज्य के लखनऊ और नोएडा जिलों में 1,000 से अधिक नए मामले सामने आए।
पिछले 24 घंटे में चार मरीजों की मौत भी हुई।
चुनावी कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से शुरू होंगे विधानसभा चुनाव
बता दें कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर फरवरी और मार्च में सात चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे।
10 फरवरी को पहले चरण की वोटिंग होगी। इसके बाद 14 फरवरी को दूसरे, 20 फरवरी को तीसरे, 23 फरवरी को चौथे, 27 फरवरी को पांचवें, 3 मार्च को छठवें और 7 मार्च को सातवें चरण की वोटिंग होगी। नतीजे 10 मार्च को आएंगे।
उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी विधानसभा चुनाव होंगे।
सवाल
तीसरी लहर के बीच चुनाव कराए जाने पर उठ रहे सवाल
कोरोना वायरस महामारी की तीसरी लहर के बीच विधानसभा चुनाव कराए जाने पर सवाल भी उठ रहे हैं और विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताई है।
राजनीतिक पार्टियों की बड़ी रैलियों ने इन चिंताओं को और बढ़ा दिया है। इन रैलियों में न तो लोग मास्क पहन कर आते हैं और न ही सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन होता है।
ये कोरोना वायरस के फैलने के लिए बिल्कुल मुफीद परिस्थितियां हैं।
चेतावनी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी की थी चुनावों को टालने की अपील
पिछले महीने इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी ओमिक्रॉन वेरिएंट के बढ़ते मामलों को देखते हुए चुनाव आयोग से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव एक या दो महीने टालने की अपील की थी।
कोर्ट ने आयोग से चुनावी रैलियों पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए कहा था कि अगर रैलियों को नहीं रोका गया तो स्थिति दूसरी लहर से भी बदतर हो सकती है।
हालांकि आयोग इन चिंताओं को खारिज करते हुए तय समय पर चुनाव करा रहा है।
पुरानी लापरवाही
पंचायत चुनाव के बाद आई दूसरी लहर से पस्त हो गया था उत्तर प्रदेश
कोरोना को लेकर ये लापरवाही दूसरी लहर की यादें ताजा कर रही है जब डेल्टा वेरिएंट के बढ़ते मामलों के बीच भी उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराए गए थे।
इन चुनावों के जरिए कोरोना घर-घर पहुंच गया था और लगभग हर गांव और हर परिवार को वायरस का प्रकोप झेलना पड़ा था।
इस बार आयोग ने 15 जनवरी तक रैलियों को बंद जरूर कर दिया है, लेकिन इससे घर-घर जाकर प्रचार बढ़ेगी और वायरस का प्रसार तेज होगा।