
ऑस्ट्रेलिया ने पढ़ाई के लिए आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या सीमित की, क्या है कारण?
क्या है खबर?
ऑस्ट्रेलिया ने पढ़ाई के लिए आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने की घोषणा की है। देश में वर्ष 2025 में दाखिले के लिए केवल 2,70,000 अंतरराष्ट्रीय छात्रों को ही मौका मिलेगा।
ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने यह फैसला रिकॉर्ड प्रवासन को नियंत्रित करने के लिए लिया है क्योंकि देश में घर के किराए से लेकर तमाम चीजों की कीमतें बढ़ने से परेशानी खड़ी हो गई है।
इसका कारण प्रवासी छात्रों को बताया जा रहा है।
घोषणा
शिक्षा मंत्री ने की घोषणा
शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कोरोना महामारी से पहले की तुलना में आज उनके विश्वविद्यालयों में लगभग 10 प्रतिशत अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं और इससे 50 प्रतिशत अधिक देश के निजी व्यावसायिक और प्रशिक्षण प्रदाताओं में हैं।
क्लेयर ने बताया कि नई सीमा के तहत विश्वविद्यालयों को अब 1,45,000 नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दाखिला देने की अनुमति होगी, जो 2023 के स्तर के अनुरूप है।
व्यावहारिक और कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों में संख्या 95,000 तक सीमित होगी।
असर
भारत के अलावा चीन और फिलिपींस के छात्रों पर पडे़गा असर
ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले से भारत, चीन और फिलिपींस के छात्रों पर सबसे अधिक असर पड़ेगा।
आंकड़ों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में 2023 तक शुद्ध आव्रजन में रिकॉर्ड 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 5,48,800 हो गया। इसमें मुख्यतः भारत, चीन और फिलीपींस के छात्र शामिल थे।
सरकार ने विदेशी छात्रों के लिए पिछले महीने वीजा के शुल्क में भी बढ़ोतरी की है। सरकार के इस कदम पर यूनिवर्सिटीज ऑस्ट्रेलिया ने चिंता जताई और विरोध दर्ज कराया।
कारण
पाबंदी लगाने का क्या है बड़ा कारण?
रिपोर्ट्स के मुुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा लौह अयस्क, गैस और कोयले के बाद चौथा सबसे बड़ा निर्यात है, जिसने 2022-2023 वित्तीय वर्ष में अर्थव्यवस्था में 2,073 अरब रुपये का योगदान दिया।
लेकिन यहां की जनता का मानना है कि विदेशी छात्रों और श्रमिकों के कारण घर का किराया महंगा हो गया है और स्थानीय स्तर पर तमाम चीजों के दाम बढ़ गए हैं।
ऑस्ट्रेलिया में अप्रवासन एक विवादास्पद मुद्दा बन गया है। यहां आम चुनाव भी जल्द हैं।