
इंग्लैंड: बचपन में जानवरों के साथ रहने वाली युवती अब बनी ब्यूटी क्वीन, जानिए पूरी कहानी
क्या है खबर?
अगर आपको जानवरों के बीच चिड़ियाघर में रहने के लिए कहा जाए तो क्या आप वहां रहना पसंद करेंगे? आपका जवाब शायद ना में हो, लेकिन इंग्लैंड की एक लड़की ने अपना बचपन चिड़ियाघर में रहकर गुजारा है।
जानवरों के बीच रहते हुए वह अपने लुक्स की परवाह किये बगैर टॉमबॉय जैसे रहने लगी, लेकिन फिर वह अचानक ऐसे अवतार में आ गई कि ब्यूटी क्वीन बन गई।
आइये आज इस लड़की की अनोखी कहानी जानते हैं।
मामला
जानवरों की देखभाल करते हुए बड़ी हुईं रिहाना
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉट्सवोल्ड्स निवासी 20 वर्षीय रिहाना कार्टियर चिड़ियाघर में विदेशी जानवरों की देखभाल करते हुए बड़ी हुईं। वह बचपन से ही तरह-तरह के जंगली और पालतू जानवरों के बीच रही हैं।
जब वह प्राइमरी स्कूल में थीं तो सुबह 6 बजे उठकर कुछ जानवरों को खाना खिलाती थीं। बचपन में रिहाना की जिस तरह की जीवनशैली थी, आमतौर पर बच्चों का बचपन वैसा नहीं गुजरता है, इस कारण उनकी संवेदना और प्यार जानवरों के लिए अधिक है।
मॉ़डलिंग
16 साल की उम्र में मॉडलिंग की दुनिया में आईं रिहाना
रिहाना के मुताबिक, उन्होंने अपनी मां से जानवरों को प्यार करना सीखा है। उनकी मां जब 15 साल की थीं, तभी से चिड़ियाघर में रहने लगी थीं, इसलिए उनका बचपन भी वहीं गुजरा।
रिहाना 12 साल की उम्र तक चिड़ियाघर में रहीं और फिर उसके बाद 16 साल की उम्र में उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा।
हालांकि, बचपन से जानवरों की बीच रहने की वजह से वह बिल्कुल टॉमबॉय थीं। उन्हें लड़कियों जैसे तौर-तरीके नहीं आते थे।
उद्देश्य
खास उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहीं रिहाना
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब रिहाना ग्लैमरस पेजेंट मॉडल हैं। वह 'मिस इको' में फाइनलिस्ट रह चुकी हैं और अब वह यूनाइटेड किंगडम (UK) की 'मिस अर्थ' प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही हैं।
रिहाना अपने टाइटिल का इस्तेमाल जानवरों के कल्याण के लिए करना चाहती हैं और साथ ही ब्रिटिश चिड़ियाघरों के अच्छे कामों को बढ़ावा देना चाहती हैं, ताकि दुर्लभ और खत्म हो रहे जानवरों को बचाया जा सके।
बयान
अमूर तेंदुए के संरक्षण का समर्थन कर रहीं रिहाना
रिहाना ने कहा, "मिस अर्थ एक पर्यावरण प्रतियोगिता है और इसमें प्रत्येक प्रतियोगी के पास एक पर्यावरणीय मुद्दा होना चाहिए, जिसका वो प्रतिनिधित्व कर सके। मैं बचपन से ही जानवरों के बीच रही हूं और उनके प्रति मेरा प्यार और स्नेह हमेशा बरकरार रहेगा, इसलिए मैंने इस प्रतियोगिता में 'पशु संरक्षण' का मुद्दा चुना है। मैं वर्तमान में अमूर तेंदुए के संरक्षण का समर्थन कर रही हूं क्योंकि 2050 तक इन तेंदुए के विलुप्त होने की 50 प्रतिशत संभावना है।"