
OpenAI की ChatGPT ऐप अब कर सकती है वेब ब्राउजिंग, सिर्फ प्रीमियम यूजर्स कर पाएंगे इस्तेमाल
क्या है खबर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट ChatGPT अब मोबाइल पर वेब सर्च भी कर सकता है। इस AI चैटबॉट को बनाने वाली कंपनी OpenAI की घोषणा के मुताबिक, यह सुविधा सिर्फ ChatGPT प्लस यूजर्स के लिए ही उपलब्ध है।
अब प्रीमियम वर्जन इस्तेमाल करने वाले ChatGPT यूजर्स सवालों का जवाब खोजने के लिए बिंग आधारित ब्राउजिंग नाम की नई सुविधा का उपयोग कर सकते हैं।
वेब ब्राउजिंग फीचर iOS और एंड्रॉयड ChatGPT ऐप दोनों पर उपलब्ध है।
वेब
'ब्राउज विथ बिंग' को शुरू करने का तरीका
ब्राउजिंग ऐप को शुरू करने के लिए सेटिंग्स के नए फीचर्स सेक्शन में जाकर मॉडल स्विचर में GPT-4 को सेलेक्ट करना होगा। इसके बाद ड्रॉप-डाउन लिस्ट से 'ब्राउज विथ बिंग' को सेलेक्ट करके इस फीचर को शुरू किया जा सकता है।
OpenAI का कहना है कि ब्राउजिंग वर्तमान घटनाओं और अन्य जानकारी से संबंधित प्रश्नों के जवाब के लिए खासतौर से उपयोगी है। इस फीचर के जरिए ChatGPT अपने ट्रेनिंग डाटा से आगे बढ़कर जानकारी देती है।
फीचर
ब्राउजिंग के बिना सीमित है ChatGPT का ज्ञान
दरअसल, ChatGPT के ब्राउजिंग फीचर को यदि बंद कर दिया जाए तो इस चैटबॉट के पास सिर्फ 2021 तक की ही जानकारी है। इसके बाद के डाटा की इसे ट्रेनिंग नहीं दी गई है।
इस बारे में OpenAI ने ChatGPT की लॉन्चिंग के समय चेतावनी भी दी थी कि इसका ज्ञान 2021 तक के डाटा पर ही आधारित है। कंपनी ने यह भी कहा था कि 2021 के बाद की घटनाओं के बारे में यह गलत जानकारी दे सकता है।
माइक्रोसॉफ्ट
वेब सर्च से उपयोगी बनी ChatGPT
ChatGPT में ब्राउजिंग फीचर दिए जाने के बारे में माइक्रोसॉफ्ट और OpenAI ने पहले ही कहा था कि यह फीचर इस साल किसी भी समय दिया जा सकता है।
ChatGPT ऐप का वेब सर्च का फीचर इस चैटबॉट को और अधिक उपयोगी बना देता है।
वेब सर्च फीचर के जरिए अब यह चैटबॉट हालिया घटनाओं के बारे में भी सही जानकारी दे पाएगी। इस फीचर की वजह से लोग चैटबॉट को रिसर्च और अन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे।
बिंग
वेब सर्च को बिंग तक सीमित किए जाने की कमियां
ChatGPT की सर्च क्षमताओं को फिलहाल बिंग तक सीमित किए जाने की कुछ कमियां भी हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी वजह से बिंग काम नहीं करता तब यूजर्स के पास वेब सर्च के लिए कोई विकल्प नहीं होगा।
दूसरी बात कि यूजर्स को किसी भी जानकारी के लिए बिंग के सर्च रिजल्ट पर ही निर्भर रहना होगा। हाल ही में, स्टैनफोर्ड के एक अध्ययन से पता चला कि बिंग के सर्च रिजल्ट में भारी मात्रा में गलत जानकारियां थीं।