
देश में भाईचारे का प्रचार करने के लिए साथ काम करेंगे RSS और जमीयत उलेमा-ए-हिंद
क्या है खबर?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और जमीयत उलेमा-ए-हिंद (JuH) एक साथ मिलकर देश में भाईचारे और सद्भाव का प्रचार करेंगे।
शुक्रवार को RSS प्रमुख मोहन भागवत और JuH प्रमुख मौलाना सईद अरशद मदनी की मुलाकात के बाद ये फैसला लिया गया है।
डेढ़ घंटे चली इस बैठक में भागवत और मदनी दोनों समुदायों में मेलजोल बढ़ाने के लिए योजना बनाने पर राजी हुए थे।
बैठक में मदनी ने भागवत से मुस्लिमों के प्रति सोच बदलने की अपील भी की।
पृष्ठभूमि
रामलाल रहे बैठ के सूत्रधार
खबरों के अनुसार, इस बैठक के सूत्रधार भारतीय जनता पार्टी से RSS में लौटे रामलाल रहे और उनके प्रयासों की वजह से ही भागवत और मदनी की मुलाकात संभव हो पाई।
पहले ये बैठक लोकसभा चुनाव से पहले होनी थी, लेकिन भागवत के पास समय की कमी के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाया।
मोदी सरकार के सत्ता में वापसी के बाद रामलाल ने एक बार फिर से प्रयास किया और इस बार वो बैठक कराने में सफल रहे।
बैठक
डेढ़ घंटे बंद कमरे में चली बैठक, केवल भागवत और मदनी रहे मौजूद
RSS के दिल्ली कार्यालय में शुक्रवार को हुई इस बैठक में केवल भागवत और मदनी मौजूद रहे।
आधे घंटे के लिए निर्धारित हुई ये बैठक डेढ़ घंटे तक चली।
बंद कमरे में हुई बैठक के बाद भागवत तो कुछ नहीं बोले, लेकिन मदनी ने जरूर थोड़ी बहुत जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बातचीत खुशगवार माहौल में हुई और उन्होंने RSS प्रमुख से मुस्लिमों के प्रति सोच बदलने की अपील की है।
चिंताएं
मदनी ने कहा, सावरकर और गोलवालकर की विचारधारा से सहमत नहीं
'हिंदुस्तान टाइम्स' को बैठक से संबंध रखने वाले सूत्रों ने बताया कि मदनी ने बैठक में तीन ऐसे मुद्दे गिनाए जिन्हें लेकर मुस्लिम चिंतित हैं- मॉब लिंचिंग, असम में NRC में मुस्लिमों के नाम नहीं होना और डर का माहौल।
सूत्रों के अनुसार, मदनी ने भागवत से कहा, "वह वीर सावरकर और एमएस गोलवालकर की विचारधारा से सहमत नहीं हैं और डर और शत्रुता का मौजूदा माहौल उनकी चिंता का विषय है।"
भरोसा
भागवत ने दिलाया भरोसा, मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं
सूत्रों के अनुसार, इन चिंताओं पर भागवत ने मदनी को भरोसा दिलाते हुए कहा कि भारत में मुस्लिमों को डरने की कोई जरूरत नहीं है और संघ की विचारधारा उन्हें हिंदुओं से अलग नहीं मानती।
उन्होंने कहा कि हमें आगे देखने की जरूरत है और हिंदुत्व का मतलब हिंदू और मुस्लिम दोनों का साथ होना है।
बैठक के एजेंडा को आगे बढ़ाते हुए दोनों संगठनों आगे कैसे काम करेंगे, इसकी योजना बनाने का काम रामलाल को दिया गया है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद
क्या है जमीयत उलेमा-ए-हिंद?
जमीयत उलमा-ए-हिंद देवबंदी विचारधारा को मानने वाला एक मुस्लिम संगठन है और इसका गठन 19 नवंबर, 1919 को हुआ था। दो महीने बाद इसके गठन को 100 साल पूरे हो जाएंगे।
JuH ने स्वतंत्रता आंदोलन के समय मुस्लिमों के लिए अलग देश की मांग का विरोध किया था और कहा था कि भारत के हिंदू और मुस्लिम एक ही हैं।
स्वतंत्रता आंदोलन में उसने कांग्रेस के साथ मिलकर काम किया था।
पुराना मामला
पहले भी हो चुकी है JuH और RSS प्रमुखों के बीच मुलाकात
वैसे ये पहली बार नहीं है जब JuH के किसी प्रमुख ने RSS प्रमुख से मुलाकात की हो।
1990 के दशक में तत्कालीन JuH प्रमुख मौलाना असद मदनी ने नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में तत्कालीन RSS प्रमुख केएस सुदर्शन से मुलाकात की थी।
वह सुदर्शन को अपने एक सम्मेलन में शामिल होने का न्यौता देने आए थे।
गौरतलब है कि 2008 में JuH दो धड़ों में बंट गया था, जिसमें से एक का नेतृत्व अरशद मदनी करते हैं।
जानकारी
अयोध्या विवाद में मुस्लिम पक्ष की पैरवी कर रहा है मदनी का धड़ा
मदनी के नेतृत्व वाला JuH का धड़ा अयोध्या जमीन विवाद में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की पैरवी कर रहा है। इस कारण बैठक को अयोध्या विवाद से भी जोड़ा गया। हालांकि, पदाधिकारियों ने साफ किया कि बैठक में इसे लेकर कोई बातचीत नहीं हुई।