
राहुल गांधी ने कंगना रनौत के बहाने प्रधानमंत्री मोदी को घेरा, पूछा- कौन बना रहा नीतियां?
क्या है खबर?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा सांसद कंगना रनौत के कृषि कानून को लेकर दिए गए बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा है।
उन्होंने एक्स पर कंगना का नाम लिए बगैर कहा, "भाजपा के लोग अपने विचारों को जांचते रहते हैं। ये किसी से कहते हैं कि ये विचार पब्लिक में रखो और फिर प्रतिक्रिया देखते हैं। यही हुआ है। उनके एक सांसद ने किसानों के काले कानूनों को वापस लाने की बात कही है।"
निशाना
राहुल ने आगे क्या कहा?
राहुल ने आगे कहा, "मोदीजी आप इसे साफ कीजिए। क्या आप इसके खिलाफ हैं, या आप फिर से बदमाशी कर रहे हैं। क्या आप किसान के कानून दोबारा से लाएंगे या नहीं? अगर आप फिर से करेंगे तो मैं गारंटी दे रहा हूं कि INDIA गठबंधन पूरा इनके खिलाफ खड़ा होगा। 700 लोग शहीद हुए हैं। उनको याद करना है, उनका आदर करना है। मोदीजी ने 2 मिनट मौन नहीं रखने दिया था। हम ये कभी नहीं भूलेंगे।"
ट्विटर पोस्ट
सुनिए, राहुल गांधी ने क्या कहा?
सरकार की नीति कौन तय कर रहा है? एक भाजपा सांसद या प्रधानमंत्री मोदी?
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 25, 2024
700 से ज़्यादा किसानों, खास कर हरियाणा और पंजाब के किसानों की शहादत ले कर भी भाजपा वालों का मन नहीं भरा।
INDIA हमारे अन्नदाताओं के विरुद्ध भाजपा का कोई भी षडयंत्र कामयाब नहीं होने देगा - अगर किसानों को नुकसान… pic.twitter.com/ekmHQq6y5D
विवाद
कंगना ने क्या कहा था?
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है, जिसमें कंगना मीडिया से बात करते हुए कह रही हैं, "जिन कृषि कानूनों को निरस्त किया गया है, उन्हें वापस लाया जाना चाहिए। मुझे लगता है कि यह विवादास्पद हो सकता है। किसानों के हित में कानूनों को वापस लाया जाना चाहिए। किसानों को खुद इसकी मांग करनी चाहिए ताकि उनकी समृद्धि में कोई बाधा न आए।"
भाजपा ने इस बयान से किनारा किया है। बाद में कंगना ने भी माफी मांगी है।
कानून
क्या 3 कृषि कानूनों का मामला?
2020 में केंद्र सरकार 3 नए कृषि कानून लेकर आई थी जिनमें निजी मंडिया बनाने और अनुबंध खेती को अनुमति देने समेत कई बड़े प्रावधान किए गए थे।
इन कानूनों का विरोध करते हुए हजारों किसानों ने 26 नवंबर, 2020 से लगभग एक साल तक दिल्ली की सीमाओं पर बड़ा आंदोलन किया था।
उनके विरोध के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर, 2021 को तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया था।