
मणिपुर: हिंसा प्रभावित चुराचांदपुर जिले जा रहे राहुल गांधी के काफिले को पुलिस ने रोका
क्या है खबर?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी मणिपुर के दौरे पर हैं। उनके काफिले को आज चुराचांदपुर जाते वक्त रास्ते में पुलिस ने रोक लिया। चुराचांदपुर मणिपुर में जातीय हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से एक है।
बताया जा रहा है कि इंफाल पहुंचने के बाद राहुल चुराचांदपुर की ओर जा रहे थे। वह यहां मणिपुर हिंसा के बाद राहत शिविरों में विस्थापित हुए लोगों से मिलने वाले थे।
पुलिस
पुलिस ने सुरक्षा कारणों की दिया हवाला
पुलिस ने बताया कि सुरक्षा कारणों से कांग्रेस नेता राहुल के काफिले को इंफाल से 20 किलोमीटर दूर बिष्णुपुर में रोक दिया गया। अधिकारियों ने उनसे सड़क मार्ग से चुराचांदपुर तक यात्रा करने की बजाय हेलीकॉप्टर से जाने का आग्रह किया है।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "हमारे लिए उनकी सुरक्षा प्राथमिकता है, इसलिए उन्हें रोका गया है और रास्ते में हिंसा की आशंका के चलते एहतियातन यह कदम उठाए जा रहे हैं।"
कांग्रेस
काफिला रोके जाने पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्या कहा?
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्विटर पर लिखा, 'मणिपुर में राहुल के काफिले को बिष्णुपुर के पास पुलिस ने रोक दिया। वे संघर्षग्रस्त राज्य के लोगों में भरोसा जगाने गए हैं।'
उन्होंने लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर पर अपनी चुप्पी तोड़ने की जहमत नहीं उठाई। अब उनकी डबल इंजन वाली विनाशकारी सरकारें सहानुभूति की सोच रखने वाले राहुल को रोकने के लिए निरंकुश तरीके अपना रही हैं। मणिपुर को शांति की जरूरत है, टकराव की नहीं।'
दो दिवसीय
2 दिवसीय मणिपुर दौरे पर हैं राहुल
राहुल दो दिवसीय मणिपुर दौरे पर हैं। वह इस दौरान राहत शिविरों में विस्थापित लोगों के मुलाकात करेंगे। इसके बाद राहुल की यहां नागरिक संगठनों के सदस्यों से बातचीत करने की भी योजना है।
मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष ओकराम इबोबी सिंह के बताया कि राहुल का 30 जून को मणिपुर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से भी मिलने का कार्यक्रम हैं। राज्य में हिंसा भड़कने के बाद यह किसी कांग्रेस नेता का पहला मणिपुर दौरा है।
हिंसा
मणिपुर हिंसा में 100 से अधिक लोगों की हो चुकी है मौत
मार्च में मणिपुर हाई कोर्ट ने मणिपुर सरकार से गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिए जाने की याचिका पर विचार करने को कहा था। इसका कुकी आदिवासियों ने विरोध किया और उनकी एकजुटता मार्च के बाद 3 मई को हिंसा भड़क गई थी।
इसके बाद से ही मणिपुर में जारी हिंसा में अब तक 100 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। यहां लगातार अलग-अलग इलाकों में हिंसा और गोलबारी की घटनाएं जारी हैं।