
अमित शाह ने गांधीनगर से नामांकन दाखिल किया, पहली बार लड़ रहे हैं लोकसभा चुनाव
क्या है खबर?
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह आज शनिवार को गांधीनगर से अपना नामांकन दाखिल किया।
नामांकन दाखिल करने से पहले उन्होंने अहमदाबाद के नारनपुरा में एक रैली को संबोधित किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी समेत कई बड़े नेता मंच पर मौजूद रहे।
गांधीनगर को भाजपा का सुरक्षित गढ़ माना जाता है और भाजपा की अंदरूनी राजनीति में यह सीट काफी महत्व रखती है।
यही कारण है कि शाह ने जहां से लड़ रहे हैं।
ट्विटर पोस्ट
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दाखिल किया पर्चा
Gandhinagar: BJP President Amit Shah files his nomination for Gandhinagar parliamentary constituency. #LokSabhaElections2019 #Gujarat pic.twitter.com/u4oMwnCk4K
— ANI (@ANI) March 30, 2019
गांधीनगर लोकसभा सीट
30 साल से सीट पर भाजपा का कब्जा
भाजपा ने इस बार गांधीनगर से अपने दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी की जगह अमित शाह को टिकट दिया है।
आडवाणी इस सीट से 6 बार सांसद रह चुके हैं।
भाजपा पिछले 30 साल से इस सीट पर जीत दर्ज करती हुई आ रही है और इसमें शाह को बेहद अहम योगदान है।
वह पिछले 23 साल से इस सीट पर आडवाणी का चुनाव प्रभार संभाल रहे थे।
यही कारण है कि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए इस सीट को चुना।
व्यक्तिगत
आडवाणी के चुनाव सफर का अंत?
पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे शाह को आडवाणी को टिकट न देने पर विरोध का सामना भी करना पड़ा। इसे आडवाणी के चुनावी सफर का अंत माना जा रहा है। 2014 लोकसभा चुनाव में उन्होंने यहां से 4,63,121 वोटों से जीत दर्ज की थी।
राजनीतिक सफर
कैसा रहा शाह का राजनीतिक सफर?
शाह के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो वह 14 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे।
वह 1982 में पहली बार नरेंद्र मोदी से मिले।
मोदी उस समय अहमदाबाद में संघ प्रचारक के तौर पर युवा इकाई का काम देख रहे थे।
शाह 1986 में भाजपा से जुड़े और अपनी मेहनत के दम पर सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए।
राम मंदिर आंदोलन के समय 1991 में गांधीनगर सीट पर उन्होंने आडवाणी के लिए प्रचार किया।
सफर
मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बढ़ी शाह की ताकत
शाह के करियर में असली उभार अक्टूबर 2001 में मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद आया।
मोदी-शाह ने मिलकर केवल कांग्रेस को बेहद कम सीटों पर समेटा, बल्कि भाजपा में अपने विरोधियों को भी किनारे लगा दिया।
शाह 2002 गुजरात विधानसभा चुनाव में पहली बार मैदान में उतरे और 1,60,000 के भारी अंतर से जीत दर्ज की।
सरकार में उन्हें कई अहम मंत्रालयों का जिम्मा सौंपा गया। वह मोदी के सबसे विश्वत सहयोगियों में शामिल थे।
कामयाबी
राष्ट्रीय स्तर पर भी सफल साबित हुई मोदी-शाह की जोड़ी
तब से लेकर राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री तक मोदी-शाह की जोड़ी गुजरात में राज करती रही।
2014 में मोदी के भाजपा का प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनने के बाद शाह को उत्तर प्रदेश का अहम प्रभार दिया गया और राज्य की 80 में से 71 सीटों पर जीत दर्ज करके उन्होंने अपनी रणनीतिक कुशलता साबित की।
भाजपा की सरकार बनने के बाद जुलाई 2014 में वह पार्टी अध्यक्ष बने और तब से इस पद पर कायम हैं।