
राज्यसभा से पास हुआ NIA को असीमित अधिकार देने वाला UAPA बिल, जानिये इसकी बड़ी बातें
क्या है खबर?
राज्यसभा ने विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण संशोधन (UAPA) विधेयक को पारित कर दिया है।
लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होेने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा।
विपक्षी दलों ने इसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की मांग की थी। यह कानून बनने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ताकत बढ़ जाएगी।
राज्यसभा में इस पर बहस के दौरान अमित शाह ने कहा आतंक के खिलाफ सभी को साथ आना चाहिए।
लोकसभा
लोकसभा में 24 जुलाई को पास हुआ बिल
गृह मंत्री ने 8 जुलाई को इस बिल को लोकसभा में पेश किया था।
संसद के निचले सदन में बिल के पक्ष में 287 जबकि विपक्ष में महज 8 वोट पड़े और यह 24 जुलाई को यहां से पारित हो गया।
इस बिल को आतंक पर लगाम लगने की कवायद मानी जा रही है।
अमित शाह ने इसके समर्थन में बोलते हुए कहा था कि यह कानून जांच एजेंसियों को आतंकियों से एक कदम आगे रखेगा।
जानकारी
इंदिरा गांधी की सरकार में बना था यह कानून
इस बिल को विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण कानून, 1967 में संशोधन के लिए लाया गया है। इसमें आतंकी गतिविधियों आदि से निपटने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इस कानून को सबसे पहले इंदिरा गांधी लेकर आई थीं।
प्रावधान
ऐसे संगठनों को आंतकी संगठन घोषित कर सकेगी
यह कानून बनने के बाद केंद्र सरकार ऐसे किसी भी संगठन को आतंकी संगठन घोषित कर सकती है-
अगर उसकी किसी भी प्रकार के आतंकी मामलों में सहभागिता पाई जाती है।
अगर वह आतंकवाद के किसी कृत्य को अंजाम देता है या इसमें भाग लेता है
अगर वह आतंकवाद को बढ़ावा देता है
या वह किसी अन्य तरीके से आतंकी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है।
इसके अलावा सरकार किसी को व्यक्तिगत तौर पर भी आतंकवादी घोषित कर सकती है।
प्रावधान
NIA की ताकत में ऐसे होगा इजाफा
अभी तक किसी जांच अधिकारी को आतंक से जुड़े मामलों में प्रॉपर्टी सीज करने के लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) की अनुमति की जरूरत होती थी।
इस बिल में प्रावधान किया गया है कि अगर ऐसे किसी मामले की जांच NIA का जांच अधिकारी करता है तो उसे संपत्ति जब्त करने के लिए राज्य के DGP की अनुमति नहीं लेनी होगी।
वह केवल NIA के महानिदेशक की अनुमति से ऐसा कर सकेगा।
प्रावधान
NIA को मिले पहले से ज्यादा अधिकार
अभी तक ऐसे किसी भी मामले की जांच DSP या ACP रैंक के अधिकारी ही कर सकते थे, लेकिन इस बिल के प्रावधान NIA के अधिकारियों को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं।
अब ऐसे किसी भी मामले की जांच इंस्पेक्टर या उससे ऊपर की रैंक के अफसर कर सकते हैं।
विपक्ष का आरोप है कि यह बिल NIA को असीमित अधिकार देता है। इससे NIA शक के आधार पर किसी को भी उठा सकती है।