
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद: मथुरा कोर्ट ने स्वीकार की मस्जिद हटाने की मांग करने वाली याचिका
क्या है खबर?
वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद की तरह अब मथुरा की ईदगाह मस्जिद का मामला भी अदालत में चलेगा।
दरअसल, मथुरा की जिला अदालत ने मस्जिद को हटाने की मांग करने वाली याचिका स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही कृष्ण जन्मभूमि से सटी ईदगाह मस्जिद को हटाने की अदालती कार्यवाही शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
कई हिंदूवादी संगठनों का दावा है कि यह मस्जिद भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर बनी हुई है।
याचिका
याचिकाकर्ता का क्या कहना है?
याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि कृष्ण जन्मभूमि पर गलत तरीके से इस मस्जिद का निर्माण किया गया था। कई साल पहले इस जगह को लेकर समझौता किया गया था, लेकिन वह अवैध है।
पहले सिविल अदालत ने इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इसे उपासना स्थल अधिनियम 1991 के तहत दायर नहीं किया जा सकता। सिविल अदालत के इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता जिला अदालत पहुंचे थे।
याचिका
याचिकाकर्ताओं ने मांगी 13.37 एकड़ जमीन
NDTV के अनुसार, मथुरा जिला अदालत ने इस मामले में 6 मई को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ वापस दिलाने की गुहार लगाई है। साथ ही इसमें उपासना स्थल अधिनियम 1991 को भी चुनौती देते हुए कहा गया है कि धर्मस्थानों का प्रबंधन और कानून-व्यवस्था राज्यों के अधीन है। ऐसे में केंद्र ने यह कानून बनाकर राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप किया है।
विवाद
क्या है शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा विवाद?
कुछ लोगों का दावा है कि 1669-70 में औरंगजेब ने कटरा केशवदेव स्थित भगवान कृष्ण के जन्म के मंदिर को ध्वस्त कर दिया था और एक संरचना बनाई गई थी और इसे ईदगाह मस्जिद कहा गया था।
100 साल बाद मराठों ने गोवर्धन की लड़ाई जीत ली और आगरा और मथुरा के पूरे क्षेत्र के शासक बन गए।
मराठों ने मस्जिद को हटाकर भगवान श्रीकृष्ण मंदिर का जीर्णोद्धार किया था।
याचिका
याचिका में 1968 के फैसले को बताया गया गैरकानूनी
1815 में अंग्रेजों ने जमीन की नीलामी कर राजापाटनी मल को बेची थी। 1944 में राजापाटनी के वारिसों ने जमीन पंडित मदन मोहन मालवीय, गोस्वामी गणेश दत्त को 19,400 रुपये में बेच दी।
उन्होंने मार्च 1951 में एक ट्रस्ट बनाया और जमीन पर मंदिर बनाने की घोषणा की।
अक्टूबर 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह सोसाइटी के बीच जमीन का ट्रस्ट होने पर समझौता हुआ था। ताजा याचिका में इस समझौते को गैरकानूनी बताया गया है।
क्या है पूरा विवाद?
न्यूजबाइट्स प्लस (जानकारी)
यह पूरा विवाद कृष्ण जन्मभूमि के 13.37 एकड़ भूमि के मालिकाना हक को लेकर है। इसमें से 10.9 एकड़ जमीन श्रीकृष्ण जन्मस्थान और 2.5 एकड़ जमीन शाही ईदगाह के पास है।
हिंदुओं का दावा है कि औरंगजेब ने यहां भगवा केशवदेव का मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई थी।
पिछले साल अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने मस्जिद के भीतर श्रीकृ्ष्ण की मूर्ति स्थापित करने का ऐलान किया था। उसके बाद से यह विवाद तूल पकड़ता गया।