
क्या है उपासना स्थल अधिनियम और ये ज्ञानवापी मस्जिद मामले से कैसे संबंधित है?
क्या है खबर?
वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद से संबंधित मामले के कारण 1991 में बना उपासना स्थल अधिनियम एक बार फिर से चर्चा में आ गया है। मुस्लिम पक्ष ने इस अधिनियम का हवाला देते हुए मस्जिद के वीडियो सर्वे को चुनौती दी है और इसके नतीजे जारी करने पर रोक लगाने की मांग की है।
आखिर ये उपासना स्थल अधिनियम क्या है और ये ज्ञानवापी मस्जिद मामले को कैसे प्रभावित करता है, आइए आपको विस्तार से बताते हैं।
अधिनियम
क्या है उपासना स्थल अधिनियम और ये कब बना?
जैसा कि नाम से ही साफ है, उपासना स्थल अधिनियम विभिन्न धर्मों के पूजा स्थलों से संबंधित है।
इस अधिनियम को दिसंबर, 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस से ठीक एक साल पहले 1991 में बनाया गया था।
इस समय राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था और सांप्रदायिक भावनाओं के भड़कने के कारण तमाम धार्मिक जगहों पर सवाल उठाए जा रहे थे।
कांग्रेस नेता पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने इस अधिनियम को संसद में पेश किया था।
प्रावधान
अधिनियम में क्या प्रावधान?
उपासना स्थल अधिनियम में देशभर के पूजा स्थलों के धार्मिक स्वरूप को बदलने पर प्रतिबंध लगाया गया है और वो 15 अगस्त, 1947 को आजादी के समय जैसे थे, उन्हें उसी धार्मिक स्वरूप में रखने का प्रावधान किया गया है।
अधिनियम की धारा 3 में एक धर्म के पूजा स्थल को दूसरे धर्म के पूजा स्थल में बदलने पर रोक लगाई गई है।
इसका मतलब एक मस्जिद को मंदिर और मंदिर को मस्जिद में नहीं बदला जा सकता।
अन्य प्रावधान
अधिनियम में और क्या-क्या महत्वपूर्ण प्रावधान हैं?
उपासना स्थल अधिनियम की धारा 4(2) में कहा गया है कि इस अधिनियम के लागू होते ही किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को बदलने के लिए चल रहे मुकदमे और याचिकाएं खारिज हो जाएंगी और इस संबंध में कोई भी नया मुकदमा दाखिल नहीं किया जा सकेगा।
इसमें यह भी कहा गया है कि अगर किसी पूजा स्थल का धार्मिक स्वरूप 15 अगस्त, 1947 के बाद बदला गया है तो इसके खिलाफ याचिका दायर की जा सकती है।
ऐतिहासिक धरोहरों
क्या ऐतिहासिक धरोहरों पर भी लागू होता है यह अधिनियम?
ताजमहल और कुतुब मीनार जैसी ऐतिहासिक धरोहरें भी उपासना स्थल अधिनियम के दायरे में आती हैं। हाल ही में ताजमहल और कुतुब मीनार को लेकर भी विवाद हुआ है और इन्हें हिंदू मंदिरों को तोड़कर बनाए जाने का दावा किया गया है।
इसे लेकर भी अधिनियम में प्रावधान है। इसके अनुसार, अगर किसी धार्मिक स्थल पर इसे किसी दूसरे धार्मिक स्थल को तोड़कर बनाए जाने के ऐतिहासिक प्रमाण मिलते हैं, तब भी इसके स्वरूप को नहीं बदला जा सकता।
जानकारी
क्या अधिनियम में बदलाव किए जा सकते हैं?
अगर केंद्र सरकार इस अधिनियम में बदलाव करना चाहती है तो वो ऐसा कर सकती है। इसके लिए उसे संसद में संशोधन विधेयक पेश करना होगा और इसे पारित करके इसे कानून का रूप देना होगा।
बाबरी मस्जिद
अयोध्या के बाबरी मस्जिद मामले से कैसे संबंधित है अधिनियम?
अयोध्या के बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद को उपासना स्थल अधिनियम से छूट दी गई थी और ये इसके दायरे में नहीं आता था।
इसी कारण इससे संबंधित मामला कोर्ट में चलता रहा और सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर, 2019 में इस पर फैसला सुनाया।
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिनियम का जिक्र किया था और इसका हवाला देते हुए अन्य किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को बदलने पर रोक लगाई थी।
मौजूदा मामला
ज्ञानवापी मस्जिद मामले को कैसे प्रभावित करता है अधिनियम?
चूंकि उपासना स्थल अधिनियम में किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को बदलने के लिए कोर्ट में याचिका डालने पर रोक लगाई गई है, ऐसे में ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर वाराणसी कोर्ट में डाली गई याचिका और इस पर सुनवाई को इस अधिनियम का उल्लंघन बताया जा रहा है।
इसके अलावा अगर मस्जिद के वीडियो सर्वे के कारण मस्जिद के स्वरूप में किसी भी तरह का बदलाव होता है तो ये भी नियमों का उल्लंघन होगा।