
#NewsBytesExplainer: रेप के आरोपी नित्यानंद और उसके तथाकथित देश 'कैलासा' की पूरी कहानी क्या है?
क्या है खबर?
पिछले कुछ दिनों से गले में रुद्राक्ष की माला, साड़ी, सिर पर पगड़ी और गहनों से लदी एक महिला का वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस महिला ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की बैठक में तथाकथित देश 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा' का प्रतिनिधित्व किया, जिसे विवादित धर्मगुरु नित्यानंद ने बसाया है।
वीडियो सामने आने के बाद से ही महिला, नित्यानंद और कैलासा को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। चलिए फिर आपको इस मामले की पूरी कहानी बताते हैं।
मामला
मामले की शुरुआत कहां से हुई?
22 फरवरी को UN की बैठक में विजयप्रिया नित्यानंद नामक महिला ने खुद को तथाकथित देश कैलासा का प्रतिनिधि बताते हुए हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि नित्यानंद 'हिंदू धर्म में सर्वोच्च गुरु' हैं और उन्हें सताया जा रहा है। विजयप्रिया ने भारत पर साजिश रचने का आरोप भी लगाया।
इसी महिला ने 24 फरवरी को UN की एक दूसरी बैठक में भी हिस्सा लिया। हालांकि, बाद में UN ने कहा कि वो विजयप्रिया की बातों को नजरअंदाज करेगा।
विजयप्रिया
कौन हैं विजयप्रिया?
विजयप्रिया के सोशल मीडिया अकाउंट से पता चलता है कि वो अमेरिका के वॉशिंगटन शहर में रहती हैं। उनका दावा है कि वो नित्यानंद की शिष्य हैं और कैलासा को चलाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
विजयप्रिया ने मैनिटोबा विश्वविद्यालय से माइक्रोबायोलॉजी में स्नातक की पढ़ाई की है। विजयप्रिया को नित्यानंद के देश कैलासा में राजनयिक का दर्जा हासिल है। वे अंग्रेजी, फ्रेंच और हिंदी भाषा की जानकार हैं।
नित्यानंद
नित्यानंद कौन हैं?
नित्यानंद का जन्म 1 जनवरी, 1978 को तमिलनाड़ु के थिरुनामलाई में हुआ था। जन्म के समय उनका नाम अरुणाचलम राजसेकरन था, जिसे बाद में बदलकर उन्होंने नित्यानंद कर लिया।
उसका दावा है कि ये नाम उन्हें महावतार बाबाजी ने हिमालय में भ्रमण के दौरान दिया था।
उसने 12 साल की उम्र में ही आध्यात्मिक शक्तियों के अनुभव का दावा किया। 2003 में उन्होंने कर्नाटक के बेंगलुरु में ध्यानपीठम नामक आश्रम की शुरुआत की।
आरोप
रेप के आरोप लगने के बाद नित्यानंद ने छोड़ा था भारत
2010 में नित्यानंद का एक अभिनेत्री संग अंतरंग वीडियो सामने आया था। तब नित्यानंद ने कहा था कि यह वीडियो फर्जी है।
बाद में अमेरिका की एक शिष्या ने नित्यानंद पर 2010 में रेप करने का आरोप लगाया। कहा जाता है कि इस मामले में 2019 में FIR दर्ज होने के बाद ही नित्यानंद विदेश भाग गया था।
अक्टूबर, 2019 में गुजरात पुलिस ने भी नित्यानंद के खिलाफ केस दर्ज कर उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया था।
कैलासा
क्या है नित्यानंद का देश कैलासा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2019 में भारत से भागने के बाद नित्यानंद ने दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर के एक द्वीप को खरीद लिया और इसे अपना देश घोषित कर दिया। इस काल्पनिक देश का नाम रखा गया कैलासा।
कैलासा की एक वेबसाइट भी बनाई गई, जिसके मुताबिक ये देश दुनियाभर में सताए गए हिंदुओं को सुरक्षा देता है। यहां जाति और लिंग का भेदभाव किए बिना सभी हिंदू शांति से रहते हैं।
झंडा
कैलासा का अपना झंडा और राष्ट्रीय पशु-पक्षी
कैलासा की वेबसाइट के अनुसार, वहां का अपना संविधान, प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री और सेना प्रमुख हैं। वेबसाइट पर संविधान और सरकार के ढांचे की जानकारी भी दी गई है।
इतना ही नही, नित्यानंद ने अपने देश का अलग झंडा 'रिषभ ध्वज' भी बनाया है। राष्ट्रीय पशु, राष्ट्रीय पक्षी, राष्ट्रीय फूल और राष्ट्रीय पेड़ जैसी चीजों का ऐलान भी किया गया है।
यहां की आधिकारिक भाषाएं अंग्रेजी, संस्कृत और तमिल हैं। चंदा देकर आप यहां के नागरिक बन सकते हैं।
सरकार
कैलासा का अपना पासपोर्ट और सरकार होने का भी दावा
कैलासा की वेबसाइट पर लिखा है, "नागरिकों को कैलासा को पासपोर्ट दिया जाएगा। परमशिव की कृपा से पासपोर्ट होल्डर सभी 11 दिशाओं और कैलासा समेत 14 लोक में मुफ्त प्रवेश पा सकेंगे।"
नित्यानंद के कथित देश की सरकार भी है, जिसमें कम से कम एक मंत्रालय और 16 विभाग हैं। इन विभागों में वाणिज्य, सूचना प्रसारण, स्वास्थ्य, वेदिक विज्ञान, धर्म और पूजा, मानव सेना, आवास और आंतरिक आदि विभाग शामिल हैं।
बैंक
कैलासा का अपना केंद्रीय बैंक भी
नित्यानंद ने अगस्त, 2020 में 'रिजर्व बैंक ऑफ कैलासा' को लॉन्च किया था। इसके अलावा उसने वहां की करेंसी को 'कैलासा डॉलर' नाम दिया था।
एक वीडियो जारी कर नित्यानंद ने कहा था, "रिजर्व बैंक और कैलासा की आर्थिक नीति पूरी तरह तैयार है। गणपति की कृपा से हम जल्द ही रिजर्व बैंक ऑफ कैलासा से जुड़ी सारी जानकारी साझा करेंगे।"
वीडियो में नित्यानंद ने दावा किया था कि गणेश चतुर्थी के दिन से बैंक कामकाज शुरू कर देगा।
कहां है कैलासा
नित्यानंद का देश कैलासा आखिर है कहां?
दावा किया जाता है कि कैलासा इक्वाडोर से सटे एक द्वीप पर बसा हुआ है। हालांकि, इक्वाडोर की सरकार इस बात को नकार चुकी है।
एक ओर कैलासा के प्रतिनिधि दुनियाभर के राजनयिकों से चर्चा करते हुए सोशल मीडिया पर फोटो डालते रहते हैं, वहीं दूसरी ओर आज तक वहां के नागरिक, मुद्रा, सरकार, इमारत और बैंक आदि से जुड़ी एक भी तस्वीर सामने नहीं आई है, इसलिए कैलासा की भौगोलिक स्थिति को लेकर कुछ भी नहीं कहा जा सकता।
मान्यता
क्या कैलासा को देश के तौर पर मान्यता मिली है?
किसी भी क्षेत्र को देश घोषित करने के लिए जरूरी शर्तें 1933 में हुए मोंटेवीडियो सम्मेलन में निर्धारित की गई थीं। इसके मुताबिक, किसी क्षेत्र को देश तभी घोषित किया जाएगा जब इसकी एक निर्धारित सीमा, स्थायी आबादी, एक सरकार और अन्य देशों के साथ संबंध रखने की क्षमता होगी।
नित्यानंद का काल्पनिक देश कैलासा इन सभी शर्तों को पूरा नहीं करता है, इसलिए उसे किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा देश की मान्यता नहीं दी गई है।
जानकारी
अभी कैलासा की स्थिति क्या है?
जब तक किसी क्षेत्र को देश का दर्जा नहीं मिलता, तब तक उसे माइक्रोनेशन कहा जाता है। माइक्रोनेशन यानी वो स्वघोषित संस्थाएं, जो देश होने का दावा करती हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र या अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा उन्हें मान्यता नहीं मिली होती।