
लॉकडाउन के बाद 30 से अधिक औद्योगिक दुर्घटनाओं में हुई 75 से अधिक मजदूरों की मौत
क्या है खबर?
कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के बाद अब देश इससे बाहर निकलने की ओर अग्रसर है।
देश में बंंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों का भी संचालन शुरू हो गया है, लेकिन महीनों बाद शुरू हुई इन इकाइयों में हादसे भी बढ़ गए हैं।
मई के बाद से अब तक औद्योगिक इकाइयों में 30 से अधिक हादसे हो चुके हैं और इनमें 75 से अधिक मजदूरों की मौत हो चुकी है।
रिपोर्ट
औद्योगिक मजदूरों के वैश्विक संघ की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार औद्योगिक मजदूरों के वैश्विक संघ (IndustriALL Global Union) की रिपोर्ट में इन हादसों का खुलासा किया गया है।
रिपोर्ट में कहा है कि लॉकडाउन में चरमराई अर्थव्यवस्थ को मजबूती देने के लिए सरकार ने मई में औद्योगिक इकाइयों के संचालन की छूट दी थी, लेकिन उसके बाद से औद्योगिक क्षेत्र में हादसे भी बढ़ गए।
गत दो महीने में ही 30 से अधिक हादसों में 75 से अधिक मजदूरों की मौत हो गई।
जानकारी
दुनियाभर में पांच करोड़ मजदूरों का प्रतिनिधित्व करता है संघ
बता दें कि औद्योगिक मजदूरों का यह वैश्विक संघ दुनियाभर के 140 देशों में ऊर्जा, खनन और विनिर्माण उद्योगों में लगे 50 मिलियन (5 करोड़) श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करता है और उनके लिए बेहतर सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रयास करता है।
हादसे
लॉकडाउन के बाद औद्योगिक इकाइयों में हुए ये बड़े हादसे
रिपोर्ट के अनुसार सरकार की अनुमति मिलने के बाद सबसे पहले 7 मई को आंध्र प्रदेश में विशाखापट्टनम के RS वेंकटपुरम गांव में LG पॉलिमर इंडस्ट्री प्लांट में जहरीली गैस का रिवास हो गया था। इसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से अधिक बीमार हो गए थे।
इसी प्रकार गुजरात के दाहेज में यशस्वी रासयान प्राइवेट लिमिटेड में बॉयलर फटने से आठ लोगों की मौत हो गई और 40 श्रमिक घायल हो गए थे।
तमिलनाडु
तमिलनाडु के पावर प्लांट में बॉयलर फटने से 20 मजदूरों की मौत
रिपोर्ट के अनुसार सात मई को तमिलनाडु के कडलूर जिले में नेयवेली लिग्नाईट कॉर्पोरेशन पॉवर प्लांट में बॉयलर फट गया था। उसमें करीब 15 मजदूरों की मौत हो गई थीं।
उसके बाद एक जुलाई को उसी प्लांट में फिर से बॉयलर फटने से पांच मजदूरों की मौत हो गई थी और 17 से अधिक मजदूर घायल हो गए।
इन हादसों ने औद्योगिक क्षेत्र की चिंताएं बढ़ा दी और मजदूरों में हादसों का भय बढ़ गया।
कारण
सुरक्षा उपायों की कमी के कारण हो रहे हादसे
रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजलीघरों में रासायनिक संयंत्रों, कोयला खदानों, इस्पात कारखानों और बॉयलर विस्फोटों की घटनाएं अभी भी जारी हैं।
इसका प्रमुख कारण है औद्योगिक इकाइयों में पर्याप्त सुरक्षा उपायों की कमी, बड़ी संख्या में संविदा मजदूरों का उपयोग तथा सरकार द्वारा नियोक्ता की जिम्मेदारी और दंडात्मक कार्रवाई तय नहीं करना है।
इसके अलावा ये हादसे इकाइयों में व्याप्त अव्यवस्था और उचित शटडाउन नहीं करने को भी उजागर करते हैं।
अनदेखी
लॉकडाउन में इकाइयों का नहीं किया गया पर्याप्त रख-रखाव
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि औद्योगिक इकाइयों के संचालकों ने लॉकडाउन के दौरान बंद पड़ी इकाइयों का उचित रख-रखाव नहीं किया और सरकार की इजाजत मिलने के साथ बिना जांच के उन्हें फिर से शुरू कर दिया।
इसी के कारण इकाइयों में होने वाले हादसों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन के बाद इकाइयों का संचालन शुरू करने से पहले सुरक्षा के लिहाज से उनकी पहले पूर्ण जांच की जानी चाहिए थीं।
पत्र
संघ के महासचिव ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
औद्योगिक मजदूरों के वैश्विक संघ के महासचिव केमल ओजकान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि औद्योगिक इकाइयों में इस तरह की गलतियां प्रक्रिया सुरक्षा प्रबंधन (PSM) विफलताओं की श्रेणी में आती हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से देश में 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी जैसे बड़े हादसों को रोकने के लिए उचित सुरक्षा उपायों और नियमों को लागू करने की अपील की है। इसके बाद ही मजदूर सुरक्षित रहेंगे।
जानकारी
विशेषज्ञ आयोग का गठन करे सरकार- संजीव रेड्डी
भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) के अध्यक्ष जी संजीव रेड्डी ने कहा कि सरकार को औद्योगिक दुर्घटनाओं का विश्लेषण करने, मजदूरों की सुरक्षा और संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक विशेषज्ञ आयोग का गठन करना चाहिए।