
अफगानिस्तान से आने वाली किसी भी समस्या से आतंकवाद की तरह निपटेगा भारत- बिपिन रावत
क्या है खबर?
अफगानिस्तान में तालिबान की हुकूमत आने के साथ आतंकवाद को बढ़ावा मिलने का खतरा पैदा हो गया है।
अमेरिका भी लगातार ISIS के पनपने की बात कह रहा है। भारत पर भी इसका बड़ा असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है।
इसी बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने तालिबानी शासन पर बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने कहा कि यदि अफगानिस्तान की ओर से कोई भी समस्या आती है तो भारत उससे आतंकवाद की तरह ही निपटेगा।
बयान
हर समस्या से आतंकवाद के तरीके से निपटेंगे- रावत
इंडिया टुडे के अनुसार, दिल्ली में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के कार्यक्रम में शामिल हुए CDS रावत ने कहा, "भारत को चिंता थी कि अफगानिस्तान से आतंकी गतिविधियां भारत आ सकती हैं। इसके लिए लगातार योजना बनाई जा रही थी और अब देश इसके लिए तैयार है।"
उन्होंने कहा, "जहां तक अफगानिस्तान का सवाल है, तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि वहां से भारत आने वाली किसी भी समस्या से हम उसी तरह निपटें, जिस तरह आतंकवाद से निपटते हैं।"
बदलाव
"तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा किए जाने की थी उम्मीद"
CDS रावत ने कहा, "जो कुछ भी हुआ है, इसकी उम्मीद की जा रही थी, सिर्फ समय में बदलाव हुआ है। भारत के नजरिए से हमें अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे का पूर्वानुमान था। यह कब्जा जितनी जल्दी हुआ, वह चौंकाने वाला है।"
उन्होंने कहा, "समय ने हमे चौंकाया हैं। हम यह अनुमान लगा रहे थे कि कब्जा कुछ महीनों बाद तक होगा, लेकिन तालिबान ने उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से आगे बढ़ते हुए कब्जा कर लिया।"
अपील
आतंकवाद के खिलाफ खूफिया जानकारी मिलने का होगा स्वागत- रावत
CDS रावत ने आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई में वैश्विक स्तर पर खूफिया सूचनाएं मिलने पर स्वागत करने की भी बात कही।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि अगर सहयोग से आतंकियों की पहचान या आतंकवाद के खिलाफ जारी वैश्विक लड़ाई में कुछ खुफिया जानकारी या किसी भी तरह का समर्थन मिलता है तो इसका स्वागत होगा।"
बता दें कि वर्तमान में कई देश आतंकवाद की समस्या से जूझ रहे हैं और इसके लिए आपसी सहयोग जरूरी है।
भिन्नता
पूरी तरह से अलग है हिंद-प्रशांत क्षेत्र और अफगान समस्या- रावत
CDS रावत ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति और अफगान समस्या को अलग-अलग करार दिया है।
उन्होंने कहा कि इन दोनों को एक ही चश्मे से देखना ठीक नहीं है और यह दोनों पूरी तरह अलग-अलग मुद्दे है।
उन्होंने आगे कहा कि हां, ये दोनों मामले क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चुनौती पेश करते हैं, लेकिन ये दोनों अलग-अलग सतह पर हैं। यह दो समानांतर रेखाएं हैं जिनके आपस में मिलने की संभावना बिल्कुल भी नहीं है।
चिंता
कूटनीतिक हथियार वाले पड़ोसियों से घिरा है भारत- रावत
CDS रावत ने कहा कि क्षेत्र में समस्या होने पर चिंता होती है। भारत के उत्तर पर मौजूद पड़ोसी (चीन) ही नहीं, बल्कि पश्चिमी सीमा (पाकिस्तान) पर मौजूद पड़ोसी के पास भी परमाणु हथियार हैं। देश कूटनीतिक हथियार वाले दो पड़ोसियों से घिरा है।
उन्होंने कहा कि भारत लगातार अपनी नीतियां विकसित कर रहा है। वह पड़ोसियों के एजेंडे को समझने की कोशिश में है और इसी हिसाब से अपनी क्षमता विकसित कर रहे हैं।