
#NewsBytesExplainer: विवादित टिप्पणी करने वाले न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की तैयारी, कैसे हटाए जाते हैं जज?
क्या है खबर?
बीते कुछ दिनों से इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश शेखर कुमार यादव खूब चर्चाओं में हैं।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक कार्यक्रम में उनके विवादास्पद बयानों को लेकर काफी विवाद हो रहा है। इस दौरान उन्होंने मुस्लिमों को 'कठमुल्ले' जैसे शब्दों से संबोधित किया और बहुसंख्यक समाज को लेकर भी टिप्पणियां कीं।
अब उन्हें पद से हटाने की मांग तेज हो रही है।
आइए जानते हैं न्यायाधीश को पद से कैसे हटाया जाता है।
बयान
सबसे पहले जानिए जस्टिस शेखर ने क्या कहा था?
8 दिसंबर को VHP ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के लाइब्रेरी हॉल में एक कार्यक्रम आयोजित किया था।
इसमें जस्टिस शेखर ने कहा था, "मुझे ये कहने में कोई झिझक नहीं है कि यह देश हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यक लोगों की इच्छा के मुताबिक चलेगा। यही कानून है। कानून तो बहुसंख्यक से ही चलता है। परिवार में भी देखिए, समाज में भी देखिए। जहां पर अधिक लोग होते हैं, जो कहते हैं उसी को माना जाता है।"
टिप्पणी
मुस्लिमों को लेकर क्या बोले थे जस्टिस शेखर?
जस्टिस शेखर ने कहा था, "जो कठमुल्ला हैं, शब्द गलत है, लेकिन कहने में गुरेज नहीं है, क्योंकि वो देश के लिए घातक हैं। जनता को बहकाने वाले लोग हैं। देश आगे न बढ़े इस प्रकार के लोग हैं। उनसे सावधान रहने की जरूरत है। देश एक है और एक संविधान है तो कानून क्यों नहीं है? देश के महापुरुषों का अनादर करने का अधिकार नहीं है। इस देश में हलाला, तीन तलाक नहीं चलने वाला है।"
महाभियोग
राज्यसभा में महाभियोग का नोटिस पेश किया गया
राज्यसभा में जस्टिस शेखर के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया गया है। 55 विपक्षी सांसदों ने न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव राज्यसभा महासचिव को सौंपा है।
इस पर कपिल सिब्बल की अगुवाई विवेक तन्खा, दिग्विजय सिंह, पीपी विल्सन समेत 55 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
इससे पहले कैंपेन फॉर ज्यूडीशियल अकाउंटैबिलिटी एंड रिफॉर्म्स (CJAR) ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी।
प्रक्रिया
क्या है न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया?
संविधान के अनुच्छेद 124(4), (5), 217 और 218 में न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रियाओं के बारे में बताया गया है।
सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए संसद के किसी भी एक सदन में नोटिस पेश करना होता है।
लोकसभा में नोटिस पेश करने के लिए कम से कम 100 और राज्यसभा में पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है।
समिति
3 सदस्यीय समिति करती है जांच
सदन में नोटिस स्वीकार होने पर सभापति या अध्यक्ष 3 सदस्यीय जांच समिति का गठन करते हैं। इसमें सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश, हाई कोर्ट के एक मुख्य न्यायाधीश और एक न्यायविद को शामिल किया जाता है।
समिति जांच के बाद रिपोर्ट बनाकर स्पीकर को सौंपती है। स्पीकर इस रिपोर्ट को सांसदों के सामने रखते हैं।
अगर जांच में न्यायाधीश को दोषी पाया जाता है, तो उन्हें हटाने का प्रस्ताव संसद में पेश किया जाता है।
प्रस्ताव
प्रस्ताव को संसद में पारित होने की क्या हैं शर्तें?
संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव का बहुमत से पारित होना जरूरी है।
प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों की संख्या सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों की दो-तिहाई संख्या से कम नहीं होनी चाहिए।
पारित होने के बाद प्रस्ताव को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। उनके आदेश पर न्यायाधीश को हटाया जा सकता है। हालांकि, अभी तक किसी भी न्यायाधीश को इस तरह से हटाया नहीं जा सका है।
परिचय
कौन हैं जस्टिस शेखर कुमार यादव?
जस्टिस शेखर ने 1988 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली और 1990 में वकालत शुरू की।
BBC के मुताबिक, वे हाई कोर्ट में राज्य सरकार के अपर शासकीय अधिवक्ता और स्थायी अधिवक्ता के पद पर काम कर चुके हैं।
दिसंबर, 2019 में उन्होंने अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और 26 मार्च, 2021 को हाई कोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बने।
2021 में उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की बात कही थी।