
महाराष्ट्र: ठाणे के निजी अस्पताल में आग लगने से चार मरीजों की मौत
क्या है खबर?
महाराष्ट्र के ठाणे स्थित एक निजी अस्पताल में आग लगने से चार मरीजों की मौत हो गई है और कई अन्य घायल हुए हैं।
आग मुंबई से लगभग 28 किलोमीटर दूर कौसा इलाके में स्थित प्राइम क्रिटिकेयर अस्पताल में सुबह लगभग 4 बजे लगी।
दमकल विभाग की तीन गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाया गया। आग लगने के बाद अस्पताल में भर्ती 20 मरीजों को दूसरे अस्पताल में भेजा गया है।
जानकारी
जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित
NDTV ने अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि आग ने अस्पताल की पहली मंजिल को पूरी तरह तबाह कर दिया है। आग लगने के समय ICU में छह मरीज भर्ती थे, जिन्हें अब दूसरे अस्पताल में भेजा गया है।
बताया जा रहा है कि अस्पताल में कोई कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती नहीं था।
अभी तक आग के कारणों की जानकारी नहीं मिल पाई है। मामले की जांच के लिए प्रशासन ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
आर्थिक सहायता
मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये मुआवजा देगी सरकार
स्थानीय विधायक और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री जितेंद्र अवहाद ने पत्रकारों को बताया कि घटना की जानकारी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को दे दी गई है।
उन्होंने कहा कि आग त्रासदी में जान गंवाने वाले मरीजों के परिजनों को पांच-पांच लाख और घायलों को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
बता दें कि पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र समेत देशभर के अलग-अलग इलाकों में अस्पतालों में आग लगने की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
दूसरी घटना
विरार में आग लगने से हुई थी 13 मरीजों की मौत
बीते सप्ताह महाराष्ट्र के ही विरार स्थित विजय वल्लभ अस्पताल में आग लगने से 13 कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई थी।
घटना के वक्त ICU में 15 मरीज भर्ती थे, जिनमें से 13 की मौत हुई थी।
चश्मदीदों ने बताया कि एयर कंडीशनर (AC) में शॉर्ट सर्किट होने की वजह से आग लगी और मरीजों को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने के बाद अस्पताल में भर्ती 90 मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजा गया था।
आग त्रासदी
देशभर में हो चुकी हैं ऐसी कई घटनाएं
नासिक में भी एक अस्पताल में ऑक्सीजन लीक होने से 22 कोरोना संक्रमित मरीजों की जान चली गई थी।
उससे पहले छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से पांच कोरोना मरीजों की मौत हो गई थी।
वहीं पिछले साल नवंबर में गुजरात के राजकोट स्थित उदय शिवानंद अस्पताल में भी ऐसी घटना में पांच मौतें हुई थीं।
अगस्त में अहमदाबाद के श्रेय अस्पताल में आग लगने से आठ संक्रमितों की मौत हुई थी।