
महिलाओं के लिए भारत का सबसे खतरनाक राज्य है राजस्थान, जानिए स्थिति और कारण
क्या है खबर?
सरकार के तमाम दावों के बाद भी देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध नहीं थम रहे हैं।
साल 2019 में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों में कांग्रेस शासित प्रदेश राजस्थान शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। इसने वहां की पुलिस की कार्य शैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी किए गए साल 2019 के अपराध डाटा में इसका खुलासा हुआ है।
आइए जानते हैं राजस्थान की स्थिति और अपराध बढ़ने का कारण।
स्थिति
महिलाओं के खिलाफ अपराध में बेहद भयानक रही है राजस्थान की स्थिति
NCRB के डाटा के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध में राजस्थान दूसरे पायदान पर रहा है।
यहां भारतीय दंड संहिता (IPC) और विशेष तथा स्थानीय कानून (SLL) के तहत दर्ज हुए कुल अपराधों के अनुसार प्रत्येक एक लाख की आबादी पर अपराध की दर 110.4 है।
इस सूची में 177.8 की दर से असम पहले पायदान पर है, हालांकि यह छोटा राज्य है। राजस्थान के बाद हरियाणा (108.5) और ओडिशा (103.5) आता है। इसके उलट राष्ट्रीय अपराध दर 61.3 है।
दुष्कर्म
राजस्थान में 2019 में दुष्कर्म के 5,997 मामले हुए दर्ज
NCRB के डाटा के अनुसार राजस्थान में साल 2019 में 6,051 पीड़िताओं से हुए दुष्कर्म को लेकर कुल 5,997 मामले दर्ज हुए हैं।
यहां दुष्कर्म की दर राष्ट्रीय औसत दर 4.8 से कहीं अधिक 15.9 रही है।
इसी तरह 1,030 पीड़िताओं से हुए दुष्कर्म के प्रयास को लेकर कुल 1,019 मामले दर्ज हुए हैं। ऐसे में राजस्थान महिलाओं के खिलाफ अपराधों की इन दोनों श्रेणियों में देश में पहले पायदान पर रहा है।
संज्ञेय अपराध
संज्ञेय अपराधों में शीर्ष पर रहा है केरल
NCRB के डाटा के अनुसार IPC और SLL को मिलाकर राजस्थान में सभी संज्ञेय अपराधों की दर 392.2 रही है।
इस मामले में केरल 1,287.7 की दर के साथ सबसे ऊपर है। संज्ञेय श्रेणी के अपराधों में राष्ट्रीय औसत दर 367.4 रही है।
हालांकि, महिला के खिलाफ हुए अपराधों के तहत दर्ज मामलों की लंबित होने की बात की जाए तो राजस्थान 8.7 प्रतिशत के साथ शीर्ष पर है, जबकि देश में 32.4 प्रतिशत मामले लंबित हैं।
इजाफा
2018 की तुलना में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में हुई 49.11 प्रतिशत की बढ़ोतरी
NCRB के डाटा के अनुसार राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में साल 2017 में 25,993, साल 2018 में 27,866 और 2019 में 41,550 मामले दर्ज किए गए हैं।
इस हिसाब से साल 2018 में 7.21 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, लेकिन 2019 में यह वृद्धि 49.11 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
इसी तरह कुल अपराधों के तहत 2017 की तुलना में 2018 में 1,873 मामले बढ़े थे, लेकिन 2019 में यह बढ़ोतरी 53,848 की हो गई है।
जानकारी
राजधानी जयपुर की हालत बेहद खराब
डाटा के अनुसार राजस्थान की राजधानी जयपुर में 2017 की तुलना में 2018 में 2,957 अधिक मामले दर्ज हुए थे, लेकिन 2019 में रिकॉर्ड 10,008 मामले अधिक दर्ज किए गए हैं। यह डाटा प्रदेश में राजधानी की बिगड़ी हालत की ओर इशारा करता है।
विरोध
राजस्थान में भाजपा ने आयोजित किया 'हल्ला बोल' विरोध प्रदर्शन
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के खिलाफ अपराध में राजस्थान के शीर्ष पर होने को लेकर भाजपा ने सोमवार को प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के नेतृत्व में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ 'हल्ला बोल' विरोध प्रदर्शन आयोजित किया है।
भाजपा का कहना है कि मुख्यमंत्री गहलोत के 2018 में प्रदेश की बागडोर संभालने के बाद से राजस्थान महिलाओं के खिलाफ होने वाले 'अपराधों का अड्डा' बन गया है और इसका विरोध किया जाना बहुत जरूरी है।
कारण
कांग्रेस राज में तेजी से क्यों बढ़े अपराध?
कांग्रेसी शासित राजस्थान में अपराधों के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा दिए गए अनिवार्य रूप से मामला दर्ज करने के आदेशों को माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद तत्कालीन पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग ने 31 जनवरी, 2019 को सभी पुलिस अधीक्षकों को थानों में आवश्यक रूप से सभी पीड़ितो की FIR दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
उन्होंने FIR दर्ज नहीं करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश भी दिए थे।
बयान
दो दर्जन से अधिक थानाप्रभारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई- सोनी
वर्तमान पुलिस महानिदेशक (कारागार) और दिसंबर 2018 से जुलाई 2020 तक अतिरिक्त पुलिस महानिदेश (अपराध) रहे बीएल सोनी ने कहा पहले अधिक मामले दर्ज होने पर थानाप्रभारियों पर गाज गिरती थी।
इससे मामले कम दर्ज होते थे और सरकार अपराध कम करने का क्रेडिट लेती थी, लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत ने सभी की FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे।
FIR दर्ज नहीं करने पर दो दर्जन थानाप्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और आधा दर्जन को निलंबित कर दिया गया।