
दिल्ली पुलिस की FIR में ग्रेटा का नाम नहीं, 'टूलकिट' के खिलाफ होगी जांच
क्या है खबर?
बीते दिन ऐसी रिपोर्ट्स आई थीं कि दिल्ली पुलिस ने स्वीडन की युवा जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के खिलाफ FIR दर्ज की है, लेकिन बाद में पता चला कि FIR में किसी का नाम नहीं है।
पुलिस ने बताया कि किसान आंदोलन में 'विदेशी साजिश' की जांच ग्रेटा के खिलाफ न होकर उनके द्वारा शेयर की गई एक 'टूलकिट' के विरुद्ध है जो कथित तौर पर किसी खालिस्तानी समूह से संबंधित है।
आइये, यह पूरी खबर जानते हैं।
पृष्ठभूमि
क्या है मामला?
ग्रेटा थनबर्ग ने 3 फरवरी को किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट किया था।
इसके बाद उन्होंने एक 'टूलकिट' शेयर की थी, जिसमें आंदोलन की जमीनी और सोशल मीडिया की आगामी रणनीति बताई गई थी। थोड़ी ही देर बाद उन्होंने इसे डिलीट कर दिया। इसे लेकर कई सवाल उठने लगे।
इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट में नई 'टूलकिट' शेयर की थी।
पुलिस का कहना है कि इस 'टूलकिट' को बनाने वाले लोग भारत के खिलाफ साजिश रच रहे हैं।
किसान आंदोलन
खालिस्तानी संगठन ने तैयार की टूलकिट- पुलिस
दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को मीडिया को जानकारी दी कि कथित तौर पर इस 'टूलकिट' को खालिस्तानी संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन ने तैयार किया है।
स्पेशल पुलिस कमिश्नर प्रवीर रंजन ने बताया कि 'टूलकिट' में बताया गया था कि 26 जनवरी के आसपास डिजिटल स्ट्राइक करना है। इसमें 26 जनवरी को एक फिजिकल एक्शन की भी बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस को जो हुआ, उससे ऐसा लगता है कि सब कुछ पहले से निर्धारित था।
टूलकिट के खिलाफ FIR
FIR में नहीं है किसी का नाम
जब रंजन से पूछा गया कि क्या इस FIR में ग्रेटा का नाम शामिल है तो उन्होंने कहा कि इसमें किसी का नाम शामिल नहीं है। यह सिर्फ 'टूलकिट' तैयार करने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है।
FIR में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124A, 153A, 153, 120B के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जब रंजन ने पूछा गया कि यह 'टूलकिट' किसने शेयर की तो उन्होंने कहा कि आप सब लोग जानते हैं।
टूलकिट
'टूलकिट' में क्या लिखा गया है?
ग्रेटा द्वारा शेयर की गई 'टूलकिट' में भारी संख्या में लोगों को किसान आंदोलन में शामिल होने और उससे जुड़े फोटो-वीडियो शेयर करने को कहा गया था।
साथ ही इसमें भारत सरकार पर दबाव बनाने की योजना के बारे में भी लिखा गया था। इसमें भारतीय दूतावासों के बाहर प्रदर्शन की जगह और समय के बारे में बताया गया था।
इसके अलावा इसमें मीडिया घरानों, सरकारी इमारतों, अंबानी-अडानी और दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन की योजना का भी जिक्र था।
जानकारी
पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन पर भारत विरोधी गतिविधियों का आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कनाडा स्थित पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियां चला रहा है। एमओ धारीवाल के नेतृत्व वाले इस फाउंडेशन की वेबसाइट पर भारत विरोधी लेख लिखे गए हैं। कनाडा के कई सिख सांसद इससे जुड़े बताए जा रहे हैं।
प्रतिक्रिया
ग्रेटा ने फिर दोहराई किसानों के समर्थन की बात
पुलिस में मामला दर्ज होने की खबरें आने के बाद ग्रेटा ने किसान आंदोलन के प्रति अपना समर्थन फिर दोहराया।
उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'मैं अब भी किसानों के समर्थन में खड़ी हूं और उनके शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन करती हूं। किसी भी प्रकार की नफरत, धमकियां और मानवाधिकार का उल्लंघन उसे बदल नहीं सकता।"
बता दें कि इस साल नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित ग्रेटा उन अंतरराष्ट्रीय हस्तियों में शामिल हैं, जिन्होंने किसान आंदोलन का समर्थन किया है।