
दिल्ली आबकारी नीति: पूर्व आयुक्त सहित 11 अधिकारी निलंबित, उपमुख्यमंत्री ने पूर्व उपराज्यपाल पर लगाए आरोप
क्या है खबर?
दिल्ली सरकार की ओर से नई आबकारी नीति को वापस लेने के बाद भी इस पर जारी बवाल नहीं थम रहा है।
दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने आबकारी नीति में घोटाले के आरोप में तत्कालीन आबकारी आयुक्त आरव गोपी कृष्ण, तत्कालीन आबकारी उपायुक्त आनंद कुमार तिवारी सहित 11 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
इसी तरह उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मामले में पूर्व उपराज्यपाल अनिल बैजल पर आरोप लगाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को पत्र लिखा है।
निलंबित
इन अधिकारियों को किया गया है निलंबित
उपराज्यपाल ने तत्कालीन आबकारी आयुक्त और उपायुक्त के अलावा सहायक आबकारी आयुक्त पंजक भटनागर, नरेंद्र सिंह, सैक्सन अधिकारी कुलजीत सिंह, नीरज गुप्ता, सुभाष रंजन, सुमन कुमारी, डीलिंग प्रमुख सत्यव्रत भार्गव, सचिन सोलंकी और गौरव मान को भी लिंबित किया है।
यह कार्रवाई आबकारी नीति के कार्यान्वयन में गंभीर चूक, निविदा को अंतिम रूप देने में अनियमितताएं और कुछ डीलरों को टेंडर के बाद लाभ पहुंचाने को लेकर की गई है।
रिपोर्ट
उपराज्यपाल ने सतर्कता निदेशालय की रिपोर्ट को दी मंजूरी
नई शराब नीति में भ्रष्टाचार की बात सामने आने पर सतर्कता निदेशालय से इसकी जांच कराई गई थी। इसमें कई प्रकार की अनियमितताएं मिली और आबकारी आयुक्त सहित 11 अधिकारियों को दोषी पाया।
इसको लेकर सतर्कता निदेशालय ने सभी 11 अधिकारियों को के खिलाफ निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुशंषा की थी।
उपराज्यपाल सक्सेना के इस अनुशंषा को मंजूरी देने पर मुख्य सचिव ने भी कार्रवाई करने के आदेश दे दिए हैं।
जानकारी
उपराज्यपाल कर चुके हैं मामले की CBI जांच की सिफारिश
इस मामले में उपराज्यपाल सक्सेना ने पिछले दिनों आबकारी नीति के तहत जारी की कई शराब की दुकानों के पूरे मामले की CBI से जांच कराने की सिफारिश भी की थी। हालांकि, अभी तक मामले को CBI के पास नहीं भेजा गया है।
आरोप
सिसोदिया ने लगाए पूर्व उपराज्यपाल पर गंभीर आरोप
मामले में उपमुख्यंत्री मनीष सिसोदिया ने सुबह पहली बार स्वीकार किया कि दिल्ली सरकार को नई आबकारी नीति 2021-22 के तहत हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके लिए उन्होंने पूर्व उपराज्यपाल अनिल बैजल पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल ने 17 नवंबर, 2021 से लागू हुई नई व्यवस्था पर अंतिम क्षण में यू-टर्न लिया था। ऐसे में उन्होंने अब अब CBI को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की है।
आरोप
दो बार भेजी गई थी उपराज्यपाल को फाइल
सिसोदिया ने कहा कि 2021-22 आबकारी नीति को लागू करने से पहले दो बार फाइल को उपराज्यपाल के पास भेजा गया था। पहली बार उपराज्यपाल ने कुछ सुझावों और बदलावों के साथ फाइल वापस भेजी थी। उसके बाद आवश्यक बदलाव करके फाइल को नवंबर के पहले हफ्ते में दूसरी बार उनके पास भेजा गया था।
उन्होंने कहा कि नई नीति के लागू होने से 48 घंटे पहले उपराज्यपाल ने एक बड़ा बदलाव करने के लिए फाइल वापस भेज दी थी।
बदलाव
उपराज्यपाल ने क्या बदलाव करने को कहा था?
सिसोदिया ने कहा कि उपराज्यपाल ने शराब दुकानों के संचालन में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली नगर निगम (MCD) की अनुमति को आवश्यक बनाने को कहा था। उन्होंने कहा कि था कि अनधिकृत क्षेत्रों में शराब की दुकानें हैं।
सिसोदिया ने कहा कि इससे अनधिकृत क्षेत्रों में दुकानें नहीं खोली जा सकी और इससे सरकार को हजारों करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। इसके उलट कई दुकानों पर मोटी कमाई देखी गई।
आरोप
उपराज्यपाल के निर्णय से हुआ नुकसान- सिसोदिया
सिसोदिया ने कहा कि नई आबकारी नीति का प्राथमिक उद्देश्य शराब की दुकानों के असमान वितरण को समाप्त करना था, लेकिन उपराज्यपाल के निर्णय के कारण ऐसा नहीं हो पाया। उपराज्यपाल के अचानक बदलाव का कारण कुछ निजी कंपनियों या व्यक्तियों को जानबूझकर लाभ पहुंचाना हो सकता है। इससे सरकार को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसकी CBI जांच भी होनी चाहिए।
पृष्ठभूमि
दिल्ली में कब लागू हुई थी नई आबकारी नीति?
दिल्ली सरकार ने राजस्व बढ़ाने और शराब माफिया तथा नकली शराब पर अंकुश लगाने के लिए 17 नवंबर, 2021 से नई शराब नीति लागू की थी।
इसमें सभी सकरारी ठेके बंद किए थे और शहर में शराब के 849 निजी ठेके और दुकानें खोले थे।
इसके बाद भाजपा ने सरकार पर शराब को बढ़ावा देने का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया था।
इसके अलावा मई में दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने सिसोदिया पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।