
केंद्र सरकार की एडवायजरी, राज्यों से कश्मीरियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने को कहा
क्या है खबर?
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी प्रदेशों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवायजरी जारी कर शांति और सामाजिक सद्भाव सुनिश्चित करने को कहा है।
पत्र में लिखा गया है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
गृह मंत्रालय की यह एडवायजरी सरकार के उस कदम के बाद आई है, जिसमें जम्मू-कश्मीर को दिया गया विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है।
एडवायजरी
राज्य सचिवालयों और DGP को भेजे गया पत्र
मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा विभाग की तरफ से जारी इस एडवायजरी में कहा गया है कि सरकार के इस फैसले के बाद किसी भी असामाजिक तत्व को सुरक्षा, शांति और सामाजिक सद्भाव तोड़ने का मौका नहीं दिया जाना चाहिए।
यह एडवायजरी सभी राज्य सचिवालयों, सभी DGP और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भेजी गई है।
इसमें सुरक्षाबलों को 'अधिकतम अलर्ट' पर रहने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
सुरक्षा
जम्मू और कश्मीर के छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष ध्यान
सांप्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले जम्मू-कश्मीर के छात्रों और काम करने वाले लोगों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों पर रोक लगाने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं।
इसमें कहा गया है कि हिंसा भड़काने वाली, सांप्रदायिक कलह और शांति भंग करने वाली फेक न्यूज और अफवाहों और सोशल मीडिया मैसेज पर ध्यान रखा जाए।
जानकारी
देशभर में भेजे गए 8,000 अतिरिक्त जवान
केंद्र सरकार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश, ओडिशा, असम और कश्मीर घाटी में 8,000 अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों को भेजा है। बता दें कि इससे पहले कश्मीर में 38,000 हजार अर्धसैनिक जवान भेजे गए थे।
अनुच्छेद 370
सरकार ने खत्म किया अनुच्छेद 370
केंद्र सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म करने का फैसला लिया है।
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर को दो टुकड़ों में बांटने की बात कही गई है। गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इसका ऐलान किया।
अब राज्य को दो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में बांटा जाएगा।
जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों ने इस फैसले को असंवैधानिक बताया है तो वहीं कई दूसरे राजनीतिक दल इस फैसले के समर्थन में आए हैं।
केंद्र शासित प्रदेश
दिल्ली जैसी होगी जम्मू-कश्मीर की विधायी शक्ति
नई व्यवस्था के तहत जम्मू-कश्मीर अब अलग राज्य नहीं होगा। इसे दो टुकड़ों में बांटकर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है।
एक का नाम जम्मू-कश्मीर और दूसरे का लद्दाख होगा। इनका शासन लेफ्टिनेंट गवर्नर के हाथ में होगा।
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी, यानी इसकी स्थिति राजधानी दिल्ली जैसी होगी।
वहीं लद्दाख में कोई विधानसभा नहीं होगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
अनुच्छेद 370
अनुच्छेद 370 में क्या था?
अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के तहत केंद्र सरकार को राज्य में रक्षा, विदेश नीति और संचार मामलों को छोड़कर किसी भी अन्य मामले में कानून बनाने के लिए राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत होती थी।
साथ ही इस अनुच्छेद के कारण राष्ट्रपति राज्य में आर्थिक आपातकाल घोषित नहीं कर सकते थे।
अनुच्छेद के तहत राज्य का अपना अलग झंडा था और यहां विधानसभा का कार्यकाल छह साल का होता था, जबकि देश में यह पांच साल का होता है।
बदलाव
और क्या-क्या बदलेगा?
पहले जम्मू-कश्मीर के अलग संविधान के कारण यहां के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता थी। एक जम्मू-कश्मीर की और दूसरी भारतीय नागरिकता। अब यहां के नागरिकों के पास भारतीय नागरिकता होगी।
पहले राज्य में राष्ट्रपति धारा 356 के तहत आर्थिक आपातकाल लागू नहीं कर सकते थे, अब ऐसा नहीं होगा।
पहले राज्य में राज्यपाल शासन होता था, अब देश के दूसरे हिस्सों की तरह यहां भी राष्ट्रपति शासन होगा।
पहले राज्य में अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण नहीं था, अब होगा।