
खराब मौसम हो सकता है जनरल बिपिन रावत के हेलीकॉप्टर क्रैश का मुख्य कारण- रिपोर्ट
क्या है खबर?
तमिलनाडु के कोयंबटूर में जनरल बिपिन रावत के हेलीकॉप्टर क्रैश की जांच लगभग पूरी हो गई है और इसी महीने इसकी रिपोर्ट को वायुसेना को सौंप दिया जाएगा।
अपने रक्षा सूत्रों के हवाले से विभिन्न मीडिया समूहों ने ये जानकारी दी है। सूत्रों ने संकेत दिया है कि खराब मौसम हेलीकॉप्टर के अचानक क्रैश होने का कारण हो सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
रिपोर्ट
रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
NDTV के सूत्रों के अनुसार, वायुसेना की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में हेलीकॉप्टर में किसी भी तकनीकी या मैकेनिकल खराबी को खारिज किया गया है।
रिपोर्ट में कंट्रोल्ड फ्लाइट इनटू टेरेन (CFIT) को क्रैश का संभावित कारण माना गया है। ऐसा तब होता है जब पायलट अनजाने में जमीन से टकरा जाता है।
सूत्रों ने कहा कि CFIT में पायलट की गलती नहीं होती और इस मामले में कुनूर में खराब मौसम CFIT का कारण हो सकता है।
जांच
सैन्य बलों के शीर्ष पायलट की अध्यक्षता में हुई जांच
तीनों सेनाओं की इस कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की अध्यक्षता एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह ने की जो सैन्य बलों में शीर्ष हेलीकॉप्टर पायलट हैं। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने इस जांच के आदेश दिए थे।
जांच में ब्लैक बॉक्स में दर्ज फ्लाइट से संबंधित आंकड़े और कॉकपिट की बातचीत का भी विश्लेषण किया गया है। दुर्घटना के एक दिन बाद ही ब्लैक बॉक्स को बरामद कर लिया गया था।
हेलीकॉप्टर
8 दिसंबर को क्रैश हुआ था जनरल रावत का हेलीकॉप्टर
बता दें कि 8 दिसंबर को जनरल रावत और उनकी पत्नी समेत 14 लोगों को ले जा रहा वायुसेना का Mi-17V5 हेलीकॉप्टर तमिलनाडु के कोयंबटूर में क्रैश हो गया था।
जनरल रावत सुलूर हवाई अड्डे से वेलिंगटन एक कॉलेज में लैक्चर देने के लिए जा रहे थे और इसी दौरान कुनूर में हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया।
घटना में जनरल रावत और उनकी पत्नी समेत 13 लोग मारे गए थे, वहीं ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह की इलाज के दौरान मौत हुई।
पद
देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ थे जनरल रावत
दिसंबर, 2016 में थल सेनाध्यक्ष बनने वाले जनरल बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ हैं। सेनाध्यक्ष पद से रिटायर होने के बाद उन्होंने 1 जनवरी, 2020 को तीन साल के लिए CDS पद संभाला था।
जनरल रावत 16 दिसंबर, 1978 को बतौर सेकंड लेफ्टिनेंट सेना में भर्ती हो गए थे। उसके बाद वह पीछे नहीं मुड़े।
उनकी निगरानी में कई बड़े उग्रवाद और आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए गए और सर्जिकल स्ट्राइक भी उनकी निगरानी में हुई थी।