
उत्तर प्रदेश: स्कूल के एक कमरे में संचालित हो रहीं आठ कक्षाएं, पढ़ रहे 388 छात्र
क्या है खबर?
भारत के सबसे अधिक जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का एक मामला सामने आया है।
राज्य के गाजीपुर जिले के एक उच्च प्राथमिक स्कूल में छात्रों के लिए पढ़ाई करना दूभर है। यहां एक ही कमरे में आठ कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है।
इसमें 388 छात्र पढ़ने को मजबूर हैं और जिस दिन छात्रों की पूर्ण उपस्थिति होती है, उस दिन उन्हें स्कूल के बाहर पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ना पड़ता है।
पढ़ाई
एक कक्षा की पढ़ाई शुरू होने पर अन्य कक्षाओं के छात्र हो जाते हैं चुप
यह हाल है गाजीपुर के सैदपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय का जहां कुल रजिस्ट्रेशन तो 388 बच्चों का है, लेकिन कमरे में 100 से 150 छात्र ही आते हैं।
दैनिक भास्कर के मुताबिक, एक से आठ तक की कक्षाओं के लिए बने इस कमरे में जब शिक्षक कक्षा आठ के बच्चों को पढ़ाते हैं तो कक्षा एक से सात तक के बच्चे चुप हो जाते हैं।
कक्षा
एक कमरे में अलग-अलग कक्षा के छात्रों की पढ़ाई कैसे होती है?
18x35 वर्ग फुट के कमरे में जहां एक तरफ कक्षा आठ की शिक्षक अपने छात्रों को पढ़ाना शुरू करती है, वहीं दूसरी तरफ कक्षा सात की शिक्षक जमीन पर बैठकर बच्चों की कॉपी चेक करती है।
इसी कमरे में कक्षा छह की शिक्षक छात्रों को ब्लैक बोर्ड पर बुलाकर सवाल हल करवाती है।
बाकी कुछ छात्र शांत बैठे रहते हैं तो वहीं कुछ छात्र कक्षा के बाहर खड़े होकर अपनी कक्षा शुरू होने का इंतजार करते हैं।
नौकरी
शिक्षक नौकरी खोने के डर से पढ़ाने को मजबूर
अस्त-व्यस्त व्यवस्था में पढ़ाने वाली शिक्षिका रीता (बदला हुआ नाम) बताती हैं, "हम लोग रोज ऐसे ही छात्रों को पढ़ाते हैं। एक साथ पढ़ाएंगे तो उन्हें कुछ समझ नहीं आएगा। इसलिए कक्षाओं को 20-20 मिनट के गैप में पढ़ाते हैं।"
उन्होंने कहा, "एक कमरे में इतने छात्रों को पढ़ाने में परेशानी तो बहुत होती है, लेकिन हम लोग कर भी क्या सकते हैं। पढ़ाने नहीं आएंगे तो एक्शन हो जाएगा।"
शौच
शौच के लिए वापस घर चले जाते हैं छात्र
स्कूल की छात्रा अनीता ने कहा कि स्कूल में न ही कक्षाएं हैं और न ही शौचालय।
अनीता ने कहा, "शौच के लिए वापस घर जाना पड़ता है। कई बार तो हम लोग धूप में पढ़ाई करते हैं।"
वहीं एक अन्य छात्रा रेशमा ने बताया कि स्कूल में सब जगह सीमेंट और ईंटें रखी हुई है, जिस कारण सभी के कपड़े गंदे हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार तो उनके मिड-डे मील में भी गंदगी चली जाती है।
भवन
छात्रों को जल्द ही दूसरे भवन में किया जाएगा शिफ्ट
सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी (ABSA) आलोक कुमार ने टीवी 9 भारतवर्ष को बताया कि इन छात्रों का स्कूल टाउन में चलता था, लेकिन भवन जर्जर होने के चलते उन्हें दूसरे हॉल में शिफ्ट कर दिया गया।
वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) हेमंत राव का कहना है कि मामले की जानकारी उन्हें पहले नहीं थी, जिसके लिए उन्होंने अभी ABSA से बात की है और जल्द ही इस स्कूल को कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा।