
महाराष्ट्र: मिलिए IAS मिताली सेठी से, जो बच्चों की शिक्षा और स्वच्छता पर कर रहीं काम
क्या है खबर?
महाराष्ट्र के चंद्रपुर में तैनात भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी मिताली सेठी की कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणादायक साबित हो रही है।
एक दंत चिकित्सक के रूप में अच्छे वेतन वाला पेशा छोड़कर सेठी अब अपना जीवन वंचितों और विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार के लिए समर्पित कर रही हैं।
उन्होंने आदिवासी लोगों की आहार संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी बहुत काम किया है।
मिताली
कौन हैं मिताली सेठी?
सेठी का जन्म और पालन-पोषण पंजाब के जालंधर में हुआ था।
उन्होंने अमृतसर से पहले बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई की और फिर बाद में चेन्नई के एक मेडिकल कॉलेज से डेंटल सर्जरी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया।
इसके बाद उन्होंने पुडुचेरी में एक ऑर्थोडॉन्टिस्ट के रूप में काम किया।
2017 में वह IAS के तौर पर सार्वजनिक सेवा में शामिल हुईं और उन्हें मेलघाट में एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना (ITDP) को सौंपा गया।
IAS
ऐसी IAS जो लोगों से बस एक कॉल हैं दूर
योरस्टोरी के अनुसार, सेठी ने अपना फोन नंबर चंद्रपुर में जिला परिषद के कार्यालय के बाहर लिखवाया है, जहां वह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में कार्यरत हैं।
उन्होंने क्षेत्र के निवासियों को सलाह दी कि जब भी वे किसी बात पर चर्चा करना चाहें या कोई समस्या हो तो वे उनसे संपर्क कर सकते हैं।
कई लोगों ने गैर-जरूरी फोन आने की वजह से उन्हें ऐसा करने से मना किया, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की।
योगदान
अपनी पिछली पोस्टिंग के दौरान सेठी ने क्या योगदान दिया?
सेठी की पहली चुनौतीपूर्ण पोस्टिंग अमरावती जिले के मेलघाट में हुई थी जहां उन्होंने एकीकृत विकास परियोजना के लिए उप-मंडल मजिस्ट्रेट और परियोजना अधिकारी के रूप में काम किया था।
योरस्टोरी के मुताबिक, यहां पर काम करने के दौरान सेठी ने पाया कि आदिवासी क्षेत्र में खराब स्वास्थ्य और पोषण प्रमुख मुद्दे हैं।
इस दौरान उन्होंने कई परियोजनाएं शुरू कीं और बाद में उन्होंने इस जगह के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए फिल्में भी बनाईं।
स्वच्छता
अभी शिक्षा और स्वच्छता पर काम कर रहीं सेठी
जिला परिषद, चंद्रपुर की CEO के तौर पर मौजूदा समय में सेठी की प्राथमिक चिंता क्षेत्र की शिक्षा और स्वच्छता है, जिस पर कोरोना वायरस महामारी के दौरान अधिक ध्यान नहीं दिया गया।
वह जिन 15 ब्लॉकों की देखरेख करती हैं, उनमें से तीन आदिवासी और एक शहरी है।
उन्होंने 1,560 स्कूलों में लगभग 62,000 छात्रों की कान की जांच करवाई, ताकि पता लगाया जा सके कि महामारी के दौरान छात्रों की सुनने की क्षमता पर असर तो नहीं पड़ा।
पहल
सेठी ने शुरू की 'पढ़ाई भी, सफाई भी' पहल
सेठी ने मई में 'पढ़ाई भी, सफाई भी' (शिक्षा और स्वच्छता साथ-साथ) पहल शुरू की।
इसके माध्यम से उन्होंने छह महीने में 150 ग्रामीण पुस्तकालय खोलने और नए और कार्यशील शौचालयों का निर्माण करवाने का लक्ष्य तय किया ताकि बच्चे, विशेषकर लड़कियां, स्कूल लौट सकें।
इस प्रयास में उन छात्रों को साइकिल प्रदान करने का प्रावधान भी शामिल है जिनके स्कूल उनके घर से तीन किलोमीटर से अधिक दूर हैं।
सिविल सेवा
तीसरे प्रयास में पास की सिविल सेवा परीक्षा
अच्छी-खासी नौकरी कर रहीं सेठी के जीवन में इस बदलाव की शुरूआत महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एक युवा शिविर में शामिल होने के बाद हुई।
उनके अनुसार, यहीं से उनके मन में सरकारी नौकरी की तैयारी करने का ख्याल आया था। हालांकि सेठी के पति उनके इस फैसले के खिलाफ थे, लेकिन बाद में वह मान गए।
इसके बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू कर दी और तीसरे प्रयास में परीक्षा पास कर ली।