
एयर इंडिया की नीलामी: टाटा संस के बोली जीतने की रिपोर्ट, सरकार ने किया खंडन
क्या है खबर?
सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया को निजी हाथों में देने के सरकार के प्रयासों पर बड़ी खबर आई है।।
न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, नीलामी प्रक्रिया में टाटा संस ने सबसे अधिक कीमत लगाकर बोली अपने नाम कर ली है। इससे 68 साल बाद एयर इंडिया की घर वापसी होगी।
हालांकि, कुछ देर बाद ही निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) ने इस तरह की रिपोर्ट का खंडन करते हुए बाद में निर्णय करने की बात कही है।
सबसे अधिक
टाटा संस के सबसे अधिक बोली लगाने की रिपोर्ट
इंडिया टुडे के अनुसार, नीलामी प्रक्रिया में टाटा संस और स्पाइस जेट के प्रमोटर अजय सिंह ने बोलियां लगाई थी, लेकिन इसमें टाटा संस ने सबसे अधिक बोली लगाई है। मंत्रियों के एक पैनल ने अधिग्रहण के प्रस्ताव को स्वीकार भी कर लिया है।
हालांकि, बाद में DIPAM ने ट्वीट किया, 'एयर इंडिया विनिवेश मामले में सरकार द्वारा वित्तीय बोली को मंजूरी के संकेत देने वाली मीडिया रिपोर्ट गलत हैं। जब सरकार निर्णय लेगी तब मीडिया को सूचित किया जाएगा।'
नीलामी
सरकार क्यों कर रही है एयर इंडिया की नीलामी?
सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में बताया था कि वित्त वर्ष 2019-20 के अस्थाई आंकड़ों के अनुसार, एयर इंडिया पर कुल 38,366.39 करोड़ रुपये का कर्ज है।
एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड के स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) को एयरलाइन द्वारा 22,064 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने के बाद की यह रकम है।
उस दौरान सरकार ने कहा था कि यदि एयर इंडिया बिक नहीं पाती है तो उसे बंद करना ही एकमात्र उपाय है।
एयर इंडिया का विनिवेश
एयर इंडिया को बेचने की दूसरी कोशिश
सरकार की ओर से एयर इंडिया को बेचने का यह दूसरा प्रयास है। सरकार ने पहले साल 2018 में 76 प्रतिशत शेयर बेचने के लिए बोलियां आमंत्रित की थी।
उस समय शर्तें रखी गई थीं कि खरीदार को कुल 33,392 करोड़ रुपये के कर्ज की जिम्मेदारी लेनी होगी। इसके अलावा एयरलाइन के मैनेजमेंट पर सरकार का कंट्रोल रहता।
इन शर्तों के आधार पर सरकार को कोई खरीदार नहीं मिला, जिसके बाद शर्तें आसान की गई हैं।
अंतिम तारीख
15 सितंबर को थी बोली लगाने की अंतिम तारीख
सरकार ने दूसरे प्रयास में एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का निर्णय किया था। इसकी प्रक्रिया जनवरी 2020 में शुरू की थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह प्रक्रिया एक साल आगे बढ़ गई।
इस साल अप्रैल में सरकार ने इच्छुक कंपनियों से बोलियां आमंत्रित की थी और इसके लिए 15 सितंबर अंतिम तारीख तय की थी।
बोली में सरकार ने एयर इंडिया का करीब 3,000 करोड़ रुपये न्यूनमत आरक्षित मूल्य रखा था।
स्थापना
जेआरडी टाटा ने 1932 में की थी टाटा एयरलाइंस की स्थापना
बता दें कि जेआरडी टाटा ने 1932 में टाटा एयरलाइंस की स्थापना की थी। दूसरे विश्व युद्ध के वक्त विमान सेवाएं रोक दी गई थीं।
जब फिर से विमान सेवाएं बहाल हुईं तो 29 जुलाई, 1946 को टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर एयर इंडिया लिमिटेड कर दिया गया था।
आजादी के बाद 1947 में एयर इंडिया की 49 फीसदी भागीदारी सरकार ने ले ली थी। इसके बाद साल 1953 में इस एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।
संपत्ति
एयर इंडिया के पास कुल कितनी संपत्ति है?
31 मार्च, 2020 तक एयर इंडिया की कुल निर्धारित संपत्ति करीब 45,863.27 करोड़ रुपये है। इसमें एयर इंडिया की जमीन, बिल्डिंग्स, एयरक्राफ्ट फ्लीट और इंजन शामिल हैं। ऐसे में यह पूरी संपत्ति खरीददार के पास चली जाएगी, लेकिन उसे एयरलाइंस के कर्ज की जिम्मेदारी लेनी होगी।
सरकार की मानें तो नीलामी के बाद गाइडेंस के आधार पर एयर इंडिया कर्मचारियों के हितों का पूरा खयाल रखा जाएगा और उन्हें भी पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।