
विंटेज वाहनों के लिए आएंगे नए नियम, स्क्रैप पॉलिसी से बाहर लेकिन कमर्शियल यूज की मनाही
क्या है खबर?
भारत में विंटेज वाहनों के लिए नए नियम बनाए जाएंगे। इसके तहत 50 साल से अधिक पुराने वाहनों को विंटेज वाहन का दर्जा दिया जाएगा और इन्हे सरकार द्वारा जारी की गई स्क्रैप पॉलिसी से भी बाहर रखा जाएगा।
कानून मंत्रालय द्वारा विंटेज वाहनों से जुड़ी पॉलिसी को मंजूरी मिल चुकी है और अब बस सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा नोटिफाई किया जाना बाकी है।
आइये, इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
जानकारी
मोटर वाहन नियम के तहत आएंगे विंटेज वाहन
मौजूद समय में भारत में विंटेज वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए अलग से कोई नियामक संस्था नहीं है। इसलिए, इन वाहनों को केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के तहत 81A, 81B, 81C, 81D, 81E, 81F, 81G में सम्मिलित करने का प्रस्ताव दिया गया है।
इसके लिए पहले ड्राफ्ट में इन वाहनों के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के स्तर पर विंटेज मोटर वाहन समितियों के गठन का प्रस्ताव भी दिया गया था, जिसे अब हटा दिया गया है।
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कमर्शियल उपयोग पर मनाही
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि इन विंटेज वाहनों को अन्य वाहनों की तरह रोज के कामों में नहीं लाया जा सकता और न ही कमर्शियली इनका उपयोग किया जा सकता।
साथ ही सभी विंटेज वाहन मालिकों को एक स्पेशल रजिस्ट्रेशन प्लेट अपने वाहनों पर दिखाने की जरूरत होगी।
चूंकि, विंटेज वाहन एक जुनून और शौक के तौर पर रखे जाते हैं, इसलिए आप इसे अपने कलेक्शन में रखने के लिए स्वतंत्र हैं।
जानकारी
नई नंबर प्लेट का किया जाएगा उपयोग
नए नियमों के अनुसार, क्लासिक और विंटेज वाहन अब 10-अंकीय अल्फा न्यूमेरिक रेजिस्ट्रेशन प्लेट के साथ आएंगे, जहां रेजिस्ट्रेशन नंबर के साथ नया VA शामिल किया जाएगा।
बाकी गाड़ियों की तरह ही इनमे पहले राज्य कोड होगा, फिर VA शब्द विंटेज वाहन के लिए दिया जाएगा और उसके बाद गाड़ी का नंबर होगा। साथ ही केंद्रीय मोटर वाहन नियम के तहत इनमें सफेद प्लेट पर काले रंग से गाड़ी का नंबर लिखा जाएगा।
खर्च
रजिस्ट्रेशन में होगा इतना खर्च
पिछले साल सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में विंटेज वाहनों के नए सिरे से रजिस्ट्रेशन की बात कही गई थी।
ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के तहत इसके लिए एक नया रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा, जिसमें वाहन मालिक को प्रति कार 20,000 रुपये का खर्च आएगा और यह 10 साल के लिए वैध होगा।
इसके बाद रि-रजिस्ट्रेशन के लिए वाहन मालिकों को अतिरिक्त 5,000 रुपये खर्च करने होंगे।