
बांग्लादेश: सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण पर हाई कोर्ट का फैसला पलटा, हिंसा थमने की उम्मीद
क्या है खबर?
बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के विरोध में हो रही हिंसा के बीच देश के सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में लागू अधिकतर आरक्षण को खत्म कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अदालत के अपीलीय प्रभाग ने निचली अदालत (ढाका हाई कोर्ट) के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसने पिछले महीने सरकारी नौकरियों में आरक्षण को बहाल रखा था।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के आदेश को पूरी तरह अवैध भी बताया है।
आरक्षण
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कितना रहेगा आरक्षण?
अटॉर्नी जनरल एएम अमीनुद्दीन ने समाचार एजेंसी AFP से कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सेवा नौकरियों में स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को 5 प्रतिशत और अन्य श्रेणी के बच्चों के लिए 2 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को स्पष्ट रूप से अवैध करार दिया है।"
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले 30 प्रतिशत नौकरियां स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों के लिए आरक्षित की गई थी।
पृष्ठभूमि
बांग्लादेश हिंसा में गई 115 से अधिक लोगों की जान
बता दें कि हाल ही में हाई कोर्ट ने बांग्लादेश में 1971 में पाकिस्तान से आजादी की लड़ाई में लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित रखने के आदेश को बहाल रखा था।
प्रदर्शनकारी छात्र इसे खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
इसके बाद यह प्रदर्शन हिंसा में बदल गया, जिसमें अब तक 115 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 2,500 से अधिक घायल हैं।
अपील
कोर्ट ने छात्रों से परिसरों में लौटने की अपील की
कोर्ट ने सभी छात्रों से प्रदर्शन छोड़कर वापस कॉलेजों में लौटने की अपील की है। उम्मीद है कि फैसले के बाद बांग्लादेश में कई दिनों से जारी हिंसा अब थम सकती है।
बीते दिनों हिंसा बढ़ने के बाद सरकार ने पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया था और देखते ही गोली मारने के आदेश दिए थे।
पुलिस ने विश्वविद्यालय परिसरों में पत्थर फेंकने वाले प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए रबर की गोलियां भी चलाई थीं।
विवाद
आरक्षण को लेकर क्या है विवाद?
दरअसल, बांग्लादेश में स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को नौकरी में 30 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। देश के युवा इसे खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
व्यापक विरोध के बाद 2018 में प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नए आरक्षण नियम लागू कर इसे खत्म कर दिया था।
हालांकि, 5 जून को ढाका हाई कोर्ट ने हसीना के फैसले को पलटते हुए दोबारा आरक्षण लागू किए जाने का आदेश दिया। इसके बाद से प्रदर्शन शुरू हो गए थे।