
अमेरिका टैरिफ वृद्धि के बीच भारत के साथ कर रहा व्यापार समझौते पर काम
क्या है खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने के नवीनतम कदम से भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
उनकी नवीनतम टैरिफ नीति में 10 प्रतिशत आधार टैरिफ के साथ भारत के लिए 17 प्रतिशत का अतिरिक्त देश-विशिष्ट शुल्क शामिल है और इसके अगले सप्ताह से लागू होने की उम्मीद है।
हालांकि, भारत और अमेरिका दोनों के अधिकारी कथित तौर पर समय सीमा से पहले व्यापार समझौते पर भी सक्रियता से काम कर रहे हैं।
वार्ता
व्यापार समझौते के लिए आपस में वार्ता कर रहे दोनों देश
राष्ट्रपति ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार ने बताया कि राष्ट्रपति भारत, वियतनाम और इजराइल के साथ व्यापार सौदों पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं।
इस बीच, भारत सरकार टैरिफ के प्रभाव और इससे उत्पन्न होने वाले अवसरों की सावधानीपूर्वक जांच कर रही है। इसमें निर्यातकों से टैरिफ पर प्रतिक्रिया लेना और वाणिज्य मंत्रालय के माध्यम से सभी हितधारकों के साथ परामर्श करना शामिल है।
इसके बाद ही सरकार व्यापार समझौते पर आगे कोई फैसला करेगी।
उद्देश्य
ट्रंप की टैरिफ नीति का क्या है उद्देश्य?
राष्ट्रपति ट्रंप ने विदेशी विक्रेताओं को अमेरिकी उद्योगों का लाभ उठाने से रोकने के लिए बढ़ाए गए शुल्कों को मुक्ति दिवस टैरिफ कहा है।
उन्होंने भारत को सबसे अधिक टैरिफ लगाने वाला देश बताते हुए भी अपना लहजा दोस्ताना बनाए रखा है।
व्हाइट हाउस ने कहा कि भारतीय टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों के भारत में उत्पाद महंगे हो गए हैं। भारत के टैरिफ कम करने से अमेरिकी निर्यात में सालाना 5.3 अरब डॉलर (45,580 करोड़ रुपये) की बढ़ोतरी होगी।
जानकारी
टैरिफ वृद्धि से भारतीय निर्यात पर पड़ेगा प्रभाव
विशेषज्ञों ने भारत के लगभग 14 अरब डॉलर (1.02 लाख करोड़ रुपये) के इलेक्ट्रॉनिक निर्यात और 9 अरब डॉलर (77,400 करोड़ रुपये) के रत्न एवं आभूषण निर्यात पर उच्च टैरिफ के प्रभाव के बारे में चिंता जताई है। इससे परेशानी होगी।