
ड्यूक की जगह कूकाबुरा गेंद से हो सकता है WTC फाइनल, जानिए दोनों गेंदों में अंतर
क्या है खबर?
भारतीय क्रिकेट टीम और ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम के बीच विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के दूसरे चक्र का फाइनल मुकाबला 7 जून से खेला जाना है।
इंग्लैंड के 'द ओवल' में होने वाले इस खिताबी मुकाबले में इस बार ड्यूक की जगह 'कूकाबुरा' गेंद का इस्तेमाल हो सकता है।
बता दें कि WTC के पहले चक्र के फाइनल में इंग्लैंड की प्रमुख ड्यूक गेंद का इस्तेमाल किया गया था।
आइए इस खबर पर एक नजर डालते हैं।
पुष्टि
रिकी पोंटिंग ने की पुष्टि
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने शुक्रवार को कहा कि ICC ने कूकाबुरा गेंद का उपयोग करने की अनुमति दी है। हालांकि, ICC की ओर से कोई बयान नहीं आया है।
WTC के पहले संस्करण का फाइनल भी इंग्लैंड में खेला गया था, जिसमें ICC ने ड्यूक गेंदों का इस्तेमाल किया था।
हालांकि, पिछले कुछ समय से ड्यूक गेंद की खराब गुणवत्ता की शिकायतें आई है। यही वजह है दोनों टीमों ने कूकाबूरा के साथ जाने का फैसला किया है।
गेंदे
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इन 3 गेंदों का होता है इस्तेमाल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेस्ट क्रिकेट में प्रमुख रूप से SG, कूकाबुरा और ड्यूक के रूप में 3 गेंदों का इस्तेमाल किया जाता है।
भारत में SG गेंदों का उपयोग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए किया जाता है।
इसी तरह इंग्लैंड, आयरलैंड और वेस्टइंडीज में ड्यूक की गेंदों से क्रिकेट खेला जाता है।
इनके अलावा क्रिकेट खेलने वाले अन्य प्रमुख देशों में कूकाबुरा का प्रयोग किया जाता है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया भी शामिल है।
अंतर
क्या है ड्यूक और कूकाबुरा गेंदों में प्रमुख अंतर?
कूकाबुरा की गेंद में बीच की दो धारियों की सिलाई हाथ से की जाती है और बाकी की चार धारियों की सिलाई मशीन से की जाती हैं, जबकि ड्यूक की गेंद की सिलाई हाथों से ही की जाती है।
ड्यूक बॉल की सीम उभरी हुई होती है, जबकि कूकाबुरा की सीम दबी हुई होती है।
ड्यूक का रंग कूकाबुरा से ज्यादा गहरा होता है यही कारण है कि उसकी चमक ज्यादा देर तक बनी रहती है।
कूकाबरा
बल्लेबाजों को रास आती है कूकाबुरा की गेंद
दबी हुई सीम के चलते कूकाबुरा की गेंद में ज्यादा स्विंग नहीं देखने को मिलती है। शुरुआती 20 से 30 ओवर के बाद इस गेंद से नेचुरल स्विंग समाप्त हो जाती है।
इस गेंद से 40 से 50 ओवर के बाद रिवर्स स्विंग प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे में बल्लेबाजों के पास रन बनाने के अधिक अवसर होते हैं।
कूकाबुरा की गेंद बहुत सख्त होती है, जिसके चलते गेंदबाज पुरानी गेंद से भी उछाल प्राप्त कर सकते हैं।
ड्यूक
क्यों तेज गेंदबाजों को पसंद है ड्यूक की गेंद?
ड्यूक की गेंद की सीम सीधी और कसी हुई होती है, जिससे यह ज्यादा देर तक शेप में रहती है।
अन्य गेंदों की तुलना में इस गेंद से आसानी से स्विंग मिलती है और यही कारण है कि यह तेज गेंदबाजों के लिए ज्यादा फायदेमंद होती है।
इस गेंद से गेंदबाजों को 50 से 60 ओवरों तक स्विंग मिल सकती है। वहीं 20 से 30 ओवरों के बाद रिवर्स स्विंग भी मिलने लग जाती है।
WTC फाइनल
लगातार दूसरे WTC फाइनल में खेलने के लिए तैयार है भारत
गत उपविजेता भारत लगातार दूसरी बार WTC के फाइनल में पहुंचने में सफल हुआ है।
भारतीय टीम ने WTC के दूसरे चक्र में 10 मैच जीते और 5 मैच हारे हैं। इसके अलावा 3 मैच ड्रा रहे हैं। भारत ने दूसरे स्थान पर रहते हुए फाइनल में प्रवेश किया था।
शीर्ष पर रहते हुए फाइनल के लिए क्वालीफाई करने वाली ऑस्ट्रेलिया ने 11 मैच जीते हैं और 3 में हार झेली है।