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पीआर श्रीजेश ने खेला अपना आखिरी मैच, इन उपलब्धियों से भरा रहा उनका हॉकी करियर
उपलब्धियों से भरा रहा श्रीजेश का हॉकी करियर (फाइल तस्वीर: एक्स/@16Sreejesh)

पीआर श्रीजेश ने खेला अपना आखिरी मैच, इन उपलब्धियों से भरा रहा उनका हॉकी करियर

Aug 08, 2024
08:42 pm

क्या है खबर?

भारतीय हॉकी टीम ने पेरिस ओलंपिक 2024 में कांस्य पदक जीतने में सफलता हासिल की। हरमनप्रीत सिंह के नेतृत्व में खेलते हुए भारत ने स्पेन को 2-1 से हराते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। यह मुकाबला भारत के महान गोलकीपर पीआर श्रीजेश के 18 साल लम्बे अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मैच साबित हुआ। वह पहले ही अपने संन्यास की घोषणा कर चुके थे। इस बीच उनके उपलब्धियों भरे सफर के बारे में जानते हैं।

परिचय 

किसान परिवार में जन्में हैं श्रीजेश 

श्रीजेश का जन्म 8 मई, 1988 को केरल के एर्नाकुलम जिले के किझाक्कमबलम गांव में किसान परिवार में हुआ। बचपन में उन्हें लंबी कूद और वॉलीबॉल जैसे खेलों में दिलचस्पी थी। 12 साल की उम्र में उन्होंने तिरुवनंतपुरम में जीवी राजा स्पोर्ट्स स्कूल में दाखिला लिया और यहीं पर उनके कोच ने उन्हें गोलकीपिंग करने का सुझाव दिया। हॉकी कोच जयकुमार की देखरेख में वह पेशेवर खिलाड़ी बन गए और उन्होंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

2006

श्रीजेश ने 2006 में भारत के लिए किया था डेब्यू 

श्रीजेश ने साल 2006 में दक्षिण एशियाई खेलों के दौरान डेब्यू किया था। 2008 के जूनियर एशिया कप में भारत की जीत के बाद वह सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर बने थे। 6 साल तक वह भारतीय टीम का हिस्सा तो रहे, लेकिन उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले। एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में 2 पेनल्टी स्ट्रोक बचाने के बाद वह 2011 से भारतीय टीम के नियमित सदस्य थे। 2013 के एशिया कप में उन्हें सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर चुना गया था। भारत दूसरे स्थान पर था।

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2017 

2017 में चोटिल हुए थे श्रीजेश 

साल 2017 के अजलान शाह हॉकी टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच के दौरान एक खिलाड़ी से टकरा जाने पर उनका दाहिना घुटना चोटिल हो गया था। इस चोट के बाद यह माना गया कि उनका करियर खत्म हो गया है, लेकिन उन्होंने फिट होने के लिए जबरदस्त मेहनत की। चोट से उबरने के बाद उन्होंने कहा था कि मैंने जिंदगी में दूसरी बार चलना सीखा है। उस समय कोच रोलेंट ओल्टमस भी इस चोट से घबरा गए थे।

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ओलंपिक

ओलंपिक में 2 पदक जीतकर खत्म किया अपना करियर

2012 में श्रीजेश ने पहली बार ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया था। उस संस्करण में भारत 12वें स्थान पर रहा था। रियो में खेले गए 2016 ओलंपिक में भारतीय टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी। श्रीजेश ने उस टीम का नेतृत्व किया था। इसके बाद 2021 में खेले गए टोक्यो ओलंपिक में भारत ने 41 साल कांस्य पदक जीता था, जिसमें श्रीजेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उन्होंने 2024 में अपना दूसरा ओलंपिक पदक जीत के साथ करियर समाप्त किया।

जानकारी

इन प्रतियोगिताओं में भी जीत चुके थे पदक 

ईएसपीएन के मुताबिक, उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कुल 335 मैच खेले। उन्होंने भारतीय हॉकी टीम के साथ राष्ट्रमंडल खेल में 2 रजत पदक जीते थे। इसके अलावा एशियाई खेलों में 2 स्वर्ण और 1 कांस्य पदक भी जीता था।

सम्मान

इन पुरस्कारों से सम्मानित हुए हैं श्रीजेश

हॉकी में महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार की ओर से 2015 में अर्जुन पुरस्कार और 2017 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। इसके बाद 2021 में उन्हें भारत के सबसे बड़े खेल पुरस्कार 'मेजर ध्यानचंद खेल रत्न' से भी सम्मानित किया गया। उन्हें 2021 के लिए 'वर्ल्ड गेम्स एथलीट ऑफ द ईयर' भी चुना गया था। वह 2021 के लिए 'FIH गोलकीपर ऑफ द ईयर' भी चुने गए थे।

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