
2030 में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन हो जायेगा रिटायर, नासा की क्या है योजना?
क्या है खबर?
अंतरिक्ष से जुड़े विभिन्न अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला अतंरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) वर्ष 2030 में रिटायर हो जाएगा।
इसको लेकर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा लो अर्थ ऑर्बिट (पृथ्वी की निचली कक्षा) में भविष्य के निजी अंतरिक्ष स्टेशनों को स्थापित किए जाने पर काफी जोर दे रहा है।
वर्ष 2030 से पहले तक रिसर्च और ऑपरेशन को निजी अंतरिक्ष स्टेशनों में स्थानांतरित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
प्लान
जटिल स्थिति से बचने के लिए 2028 तक तैयार करना होगा विकल्प
रिसर्च और ऑपरेशन को निजी अंतरिक्ष स्टेशन में स्थानांनतरित करने में नासा की अपेक्षित 2 साल की अवधि को देखते हुए किसी भी जटिल स्थिति को रोकने के लिए एक विकल्प को 2028 तक तैयार करना होगा।
ISS के डायरेक्टर रोबिन गैटेंस ने हाल में कहा था कि यह अंतराल का प्रभाव विघटनकारी होगा।
दरअसल, ISS के रिटायर होने के बाद अंतरिक्ष में अपने मिशन भेजने के इच्छुक वैज्ञानिकों के साथ-साथ क्रू और कार्गो परिवहन प्रदाता भी प्रभावित होंगे।
नासा
लागत वृद्धि और शेड्यूल से बचने के लिए नासा भागीदारों के साथ करेगी काम
नासा के कमर्शियल लो अर्थ ऑर्बिट डेस्टिनेशंस (CLD) प्रोग्राम की प्रबंधक एंजेला हार्ट ने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी टेक्नोलॉजी से जुड़ी अपनी विशेषज्ञता निजी अंतरिक्ष स्टेशन प्रदाताओं को देगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, एंजेला ने कुछ दिनों पहले की एक बातचीत के दौरान बताया था कि अगले साल नासा लागत वृद्धि और शेड्यूल संबंधी समस्याओं से बचने के लिए भागीदारों और विज्ञान समुदाय के साथ काम करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
स्टेशन
ISS के साझेदार 2030 तक जारी रखेंगे समर्थन
वर्तमान में जापान, कनाडा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) सहित ISS साझेदारों ने रिटायर होने तक यानी वर्ष 2030 तक इस अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन का समर्थन करने की प्रतिबद्धता जताई है।
हालांकि, रूस ने केवल 2028 तक अपने समर्थन की बात कही है, जिसके बाद वह अपना स्वयं का ऑर्बिटल स्पेस स्टेशन बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
रूस के स्पेस स्टेशन का पहला मॉड्यूल वर्ष 2027 में लॉन्च होने की उम्मीद है।
रिसर्च
क्या है ISS?
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन धरती से ऊपर, अंतरिक्ष में वह जगह है, जहां रुककर वैज्ञानिक कई तरह की रिसर्च और प्रयोग करते हैं।
इनके रहने के लिए यहां स्लीपिंग क्वार्टर, बाथरूम और अन्य चीजें हैं।
ISS पर एक वक्त में आमतौर पर 7 क्रू रहते हैं। इनकी संख्या बढ़ भी सकती है।
इसे नासा के नेतृत्व में रूस, जापान, कनाडा सहित 15 देशों के सहयोग से बनाया गया है और इन देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां भी इससे जुड़ी हैं।
लैब
ISS के रिटायर के बाद नासा बनाएगा राष्ट्रीय प्रयोगशाला
ISS वर्ष 2000 से काम कर रहा है। पहले इसे 2024 तक ऑपरेट करने की योजना थी, लेकिन नासा ने 2030 तक इस्तेमाल की अवधि को बढ़ा दिया।
इसकी लागत लगभग 12 लाख करोड़ रुपये आई थी।
धरती से ISS तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए कार्गो स्पेसक्राफ्ट इस्तेमाल होता है।
वर्ष 2030 में ISS के सेवानिवृत्त होने के बाद नासा द्वारा एक राष्ट्रीय प्रयोगशाला संचालित करने की संभावना है। यह प्रयोगशाला विभिन्न कॉमर्शियल प्लेटफॉर्मों का समर्थन करेगी।