
ISRO को लगा बड़ा झटका, आखिरी चरण में असफल हुआ नए रॉकेट से जुड़ा अभियान
क्या है खबर?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सामने इसका नया रॉकेट लॉन्च करते वक्त एक परेशानी आ गई और अभियान सफल नहीं रहा।
दो सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में लेकर जा रहे स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च वीइकल (SSLV) ने इसकी उड़ान के आखिरी फेज में डाटा लॉस का सामना किया।
ISRO के वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स ने डाटा एनालिसिस के बाद पाया कि 120 टन वजन वाला वीइकल दोनों सैटेलाइट्स को उनकी कक्षा में सफलतापूर्वक नहीं भेज पाया।
परेशानी
इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे सैटेलाइट
सैटेलाइट्स के उनकी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित ना हो पाने के चलते इस अभियान को सफल नहीं कहा जा सकता।
ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ ने कहा, "SSLV-D1 ने सभी चरणों में वैसा ही प्रदर्शन किया जिसकी हमें उम्मीद थी। हालांकि, अभियान के टर्मिनल फेज में कुछ डाटा लॉस हुआ।"
कुछ देर बाद आए आधिकारिक अपडेट में बताया गया कि रॉकेट सैटेलाइट्स को उनकी सही कक्षा में स्थापित नहीं कर सका, जिससे उन्हें इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
सैटेलाइट्स
SSLV की मदद से भेजे गए थे दो सैटेलाइट्स
ISRO का नया SSLV दो सैटेलाइट्स लेकर गया था, जिनमें अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-02 के साथ आजादीसैट सैटेलाइट भी शामिल रहे।
बता दें, आजादीसैट को 'स्पेस किड्ज इंडिया' की छात्रों की टीम ने तैयार किया है। यह संगठन सरकारी स्कूल के छात्रों की अंतरिक्ष विज्ञान के बारे में समझ बढ़ाने में मदद करता है।
आजादीसैट में 750 छात्रों की ओर से तैयार किए गए 75 पेलोड्स शामिल हैं, जिन्हें भारत की आजादी के 75 साल सेलिब्रेट करते हुए बनाया गया है।
मिशन
स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च वीइकल (SSLV) को समझें
स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च वीइकल (SSLV) को छोटे सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजने के लिए तैयार किया गया है।
आने वाले दिनों में इसे श्रीहरिकोटा में स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च कॉम्प्लेक्स (SSLC) नाम का लॉन्च पैड दिया जाएगा।
इसके अलावा तमिलनाडु के कुलशेखरपाटनम में एक डेडिकेटेड लॉन्च साइट भी तैयार की जाएगी।
इस अभियान की सफलता तय करती कि आने वाले वक्त में छोटे सैटेलाइट्स भेजने के लिए बड़े और महंगे वीइकल्स की जरूरत ना पड़े।
योजना
अंतरिक्ष यात्रियों को मिशन पर भेजने की तैयारी
पिछले महीने ISRO ने अपने बड़े मिशन्स के लिए नई समयसीमा तय की है। ISRO का पहला सौर और तीसरा चंद्रमा मिशन अगले साल की पहली तिमाही में लॉन्च होगा।
गगनयान मिशन के लिए पहला अबॉर्ट डेमोनस्ट्रेशन इसी साल के आखिर में किया जाएगा और ISRO अंतरिक्ष यात्रियों को मिशन पर भेजेगी।
मिशन पर 10,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसमें अंतरिक्ष यात्री लो-अर्थ ऑर्बिट में भेजे जाएंगे।
जानकारी
न्यूजबाइट्स प्लस
लो-अर्थ ऑर्बिट पृथ्वी की सतह से सबसे करीब मौजूद अंतरिक्ष का हिस्सा है, जो समुद्र तल से करीब 160 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। इसके बाद क्रम से मीडियन अर्थ ऑर्बिट, जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट और हाई-अर्थ ऑर्बिट्स आते हैं।