
ISRO का एक और कारनामा, सफलतापूर्वक लॉन्च किए 31 सैटेलाइट
क्या है खबर?
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नाम एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है।
ISRO ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सुबह 9 बजकर 58 मिनट पर पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) C-43 लॉन्च कर दिया। PSLV के रवाना होने के बाद महज 112 मिनट में संपूर्ण अभियान पूरा हो जाएगा।
यह अपने साथ 31 सैटेलाइट लेकर अंतरिक्ष में गया है। इनमें भारत का हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट (HysIS) और आठ देशों के 30 सैटेलाइट शामिल हैं।
ट्विटर पोस्ट
श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से हुई लॉन्चिंग
#Watch ISRO launches HysIS and 30 other satellites on PSLV-C43 from Satish Dhawan Space Centre in Sriharikota. #AndhraPradesh pic.twitter.com/ZtI295a4cy
— ANI (@ANI) November 29, 2018
सैटेलाइट लॉन्चिंग
28 घंटे पहले शुरू हुई थी उल्टी गिनती
इस लॉन्चिंग में ISRO ने 31 सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे हैं। इनमें से अमेरिका के 23 सैटेलाइट और ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया, फिनलैंड, मलेशिया, नीदरलैंड एवं स्पेन के एक-एक सैटेलाइट शामिल हैं।
अंतरिक्ष में भेजे गए 31 सैटलाइट का कुल भार 261.5 किलोग्राम है। सभी 30 विदेशी सैटेलाइट 504 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित किए जाएंगे। इनमें ग्लासगो के दो नैनो सैटेलाइट भी हैं।
इस लॉन्चिंग की उल्टी गिनती 28 घंटे पहले बुधवार को 05:58 AM पर शुरू हो गई थी।
भारतीय सैटेलाइट
धरती का अध्ययन करेगा ISRO का HysIS
भारत के HysIS को पृथ्वी के निरीक्षण के लिए ISRO ने ही विकसित किया है। यह PSLV C-43 का प्राथमिक सैटेलाइट है।
इसे 636 किलोमीटर घ्रुवीय सूर्य समन्वय कक्ष (SSO) में 97.957 डिग्री के झुकाव के साथ स्थापित किया जाएगा।
इसका उद्देश्य पृथ्वी की सतह के साथ इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पैक्ट्रम में इंफ्रारेड और शॉर्ट वेव इंफ्रारेड फील्ड का अध्ययन करना है।
इसे 'ऑप्टिकल इमेजिंग डिटेक्टर ऐरे' नाम की विशेष चिप की मदद से तैयार किया गया है।
GSAT-29
सुदूर इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने के लिए छोड़ा GSAT-29
इससे पहले 14 नवंबर को ISRO ने GSAT-29 की सफल लॉन्चिंग की थी। दावा किया जा रहा है कि यह सैटेलाइट अगले 10 साल तक काम करता रहेगा।
इस सैटेलाइट से जम्मू कश्मीर और उत्तर पूर्व के राज्यों में इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिलेगी।
इस सैटेलाइट में हाई क्वॉलिटी कैमरा लगा है, जिसके जरिए देश के इन दोनों संवेदनशील हिस्सों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
यह श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ 67वां और भारत का 33वां संचार सैटेलाइट था।