
त्रिपुरा चुनाव: माणिक्य देबबर्मा की नई 'टिपरा मोथा' पार्टी ने त्रिकोणीय बनाया मुकाबला, जानें अहम बातें
क्या है खबर?
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। यहां सत्तारूढ़ भाजपा गठबंधन और कांग्रेस-वाम गठबंधन के अलावा नवगठित अदिवासी पार्टी 'टिपरा मोथा' भी इस बार चुनाव मैदान में हैं।
टिपरा मोथा ने हाल में अपना चुनावी घोषणापत्र जारी करते हुए इस मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। त्रिपुरा में आगामी 16 फरवरी को मतदान होना है।
आइये जानते हैं कि इस नवगठित पार्टी को स्थापित करने वाले प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा कौन हैं।
टिपरा मोथा
शाही परिवार से ताल्लुक रखते हैं माणिक्य देबबर्मा
टिपरा मोथा का नेतृत्व शाही परिवार के वशंज 45 वर्षीय प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा कर रहे हैं। उनका जन्म दिल्ली में हुआ था और वह अब त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में रहते हैं।
उन्होंने एक समाचार पत्र के संपादक के रूप में भी काम किया है। उन्हें स्थानीय लोगों के बीच ''महाराजा' के रूप में जाना जाता है और वह राज्य में आदिवासियों के अधिकारों के लिए उठने वाली सक्रिय आवाजों में से एक हैं।
परिवार
प्रद्योत के पिता तीन बार रह चुके हैं सांसद
प्रद्योत के पिता किरीट बिक्रम देबबर्मा एक सक्रिय कांग्रेस नेता हैं और तीन बार सांसद रह चुके हैं। उनकी मां विभु कुमारी भी कांग्रेस से दो बार विधायक चुनी गई थीं और उन्होंने त्रिपुरा सरकार में राजस्व मंत्री के रूप में भी काम किया था।
प्रद्योत भी अपनी अलग पार्टी बनाने से पहले कांग्रेस के साथ ही जुड़े थे। इस चुनाव में उनकी पार्टी ने किसी भी पार्टी से गठबंधन करने से इनकार कर दिया है।
घोषणा पत्र
घोषणापत्र में की अलग 'ग्रेटर तिप्रालैंड' की मांग
टिपरा मोथा को लगता है कि स्वदेशी लोग अपनी ही मातृभूमि में अल्पसंख्यक बन गए हैं क्योंकि बांग्लादेश से हिंदू प्रवासियों की बाढ़ आ गई है, इसलिए पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में एक अलग राज्य 'ग्रेटर तिप्रालैंड' के लिए लड़ने का वादा किया है।
इसके अलावा 20,000 नई नौकरियां, आदिवासी परिषद के लिए एक पुलिस बल की स्थापना और आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों के लिए पुनर्वास पैकेज जैसे वादे भी घोषणापत्र में शामिल हैं।
विधानसभा चुनाव
60 में 42 सीटों पर चुनाव लड़ेगी पार्टी
नवगठित पार्टी ने 2021 में त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) चुनावों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था और इस चुनाव में 30 में से 18 सीटें जीती थीं।
पार्टी का त्रिपुरा की 60 में से 20 आदिवासी बहुल विधानसभा सीटों पर काफी प्रभाव है। इसी कारण पार्टी ने भाजपा से गठबंधन की पेशकश को नकारते हुए अकेले अपने दम पर 42 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
प्रचार
भाजपा ने चुनाव प्रचार में झोंकी ताकत
वामदलों के 25 सालों के शासन को समाप्त करते हुए भाजपा ने 2018 में त्रिपुरा में सत्ता हासिल की थी और वह सत्ता पर काबिज बने रहना चाहती है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यहां आज दो चुनावी रैलियां संबोधित करने वाले हैं और इस महीने में उनका यह दूसरा चुनावी दौरा है।
इसके अवाला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी यहां चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे।
गठबंधन
त्रिकोणीय मुकाबला होने से कांग्रेस-वाम गठबंधन को फायदा
त्रिपुरा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला होने से कांग्रेस-वाम को फायदा होने की उम्मीद है। भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए कांग्रेस और वामदलों में यहां गठबंधन हो गया है और इससे पहले दोनों पक्ष यहां हमेशा से एक-दूसरे के धुर-विरोधी रहे हैं।
हालांकि, इस गठबंधन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ज्यादातर सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी इस बार चुनावी मैदान में है।