
केजरीवाल का कांग्रेस और अन्य पार्टियों को पत्र, दिल्ली विधेयक पर समर्थन के लिए धन्यवाद कहा
क्या है खबर?
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज कांग्रेस समेत विपक्षी गठबंधन INDIA के वरिष्ठ नेताओं पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में विपक्षी नेताओं का दिल्ली सेवा विधेयक पर समर्थन के लिए शुक्रिया अदा किया।
उन्होंने पत्र में लिखा कि वह दिल्लीवासियों और आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर विपक्षी नेताओं की सराहना करते हैं और उनका साथ दशकों तक याद रखा जाएगा।
बता दें कि सोमवार को विपक्षी गठबंधन की आपत्तियों के बावजूद राज्यसभा में यह विधेयक पारित हो गया।
पत्र
केजरीवाल ने विपक्ष के किन-किन नेताओं को लिखा पत्र?
AAP के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने दिल्ली सेवा विधेयक पर समर्थन के लिए राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, नीतीश कुमार, उद्धव ठाकरे, ममता बनर्जी, शरद पवार, एमके स्टालिन, हेमंत सोरेन और के चंद्रशेखर राव समेत अन्य वरिष्ठ विपक्षी नेताओं को पत्र लिखा।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता शिबू सोरेन को विशेष धन्यवाद देते हुए पत्र में लिखा है कि स्वास्थ्य बेहद खराब होने के बावजूद वह लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में शामिल हुए।
पत्र
केजरीवाल ने पत्र में क्या लिखा?
केजरीवाल ने धन्यवाद पत्र में लिखा, 'मैं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 को अस्वीकार करने और उसके खिलाफ मतदान करने में आपकी पार्टी के समर्थन के लिए दिल्ली के 2 करोड़ लोगों की ओर से आभार व्यक्त करता हूं।'
उन्होंने लिखा, 'मुझे यकीन है कि भारतीय संविधान के सिद्धांतों के प्रति आपकी अटूट निष्ठा दशकों तक याद रखी जाएगी। हम संविधान को कमजोर करने वाली ताकतों के खिलाफ लड़ाई में आपसे हमेशा समर्थन की आशा करते हैं।'
विधेयक
दोनों सदनों में बहुमत से पारित हो गया है दिल्ली सेवा विधेयक
दिल्ली में नौकरशाहों की नियुक्ति और ट्रांसफर का नियंत्रण उपराज्यपाल को देने वाला विधेयक संसद के दोनों सदनों में बहुमत से पारित हो गया है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा।
विवादस्पद विधेयक को राज्यसभा में पारित कराने के लिए सरकार के पास बहुमत नहीं था, लेकिन बीजू जनता दल (BJD) और YSR कांग्रेस जैसे पार्टियों के समर्थन से यह पारित हो गया।
वर्तमान 237 राज्यसभा सांसदों में से 131 ने विधेयक के पक्ष में वोट किया।
मामला
क्या है दिल्ली विधेयक का पूरा मामला?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को जारी अपने एक आदेश में कहा था कि अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पर केंद्र नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार का अधिकार है।
इसके बाद केंद्र ने 19 मई को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) अध्यादेश जारी किया था और ये अधिकार उपराज्यपाल (LG) को दे दिए थे।
इस अध्यादेश की जगह लेने के लिए ही विधेयक लाया गया, जो लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो चुका है।
विधेयक
विधेयक पर केंद्र का क्या कहना है?
सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा था, "विधेयक किसी भी तरह से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन नहीं करता है। विधेयक का उद्देश्य दिल्ली में प्रभावी भ्रष्टाचार मुक्त शासन करना है क्योंकि यह एक केंद्र शासित प्रदेश है।"
शाह ने अपनी बात के पक्ष में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का भी जिक्र किया था, जो दिल्ली को अलग राज्य बनाए जाने के पक्ष में नहीं थे।