
क्या है हर साल होने वाला जलीकट्टू खेल, जानिये इसके बारे में
क्या है खबर?
भारत एक ऐसा देश है जहां अलग-अलग जाति-धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। देश के हर हिस्से में त्योहारों और परंपराओं का अलग-अलग आनंद हैं।
आपको बता दें कि इन परंपराओं में एक ऐसा खेल भी शामिल हैं, जिसे हर साल लोग अपनी जान दांव पर लगाकर खेलते हैं।
हम तमिलनाडु में पोंगल के दिन होने वाले जल्लीकट्टू के खेल की बात कर रहे हैं।
आइये, इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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क्या है जल्लीकट्टू खेल?
तमिलनाडु में हर साल पोंगल के माैके पर जल्लीकट्टू प्रतियोगिता करवाई जाती है। जिसमें दक्षिण भारत के लोग परंपरा के रूप में हिस्सा लेते हैं।
जल्लीकट्टू शब्द में 'जल्ली' का मतलब 'सिक्का' और 'कट्टू' का मतलब 'सांड के सींग पर बंधा कपड़ा' होता है। इस दिन आदमी और बैल के बीच में दंगल करवाया जाता है।
इसमें जाे आदमी बैल के सींग पर बंधे कपड़े को उतारने में कामयाब होता है, वह इस प्रतियोगिता का विजेता होता है।
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कब हुई थी इस खेल की शुरुआत
जल्लीकट्टू खेल का पुराना नाम इरुखझुवुथल है। इसकी शुरुआत 200 साल पहले परंपरा के रूप में हुई थीं।
उस समय लड़की की शादी के लिए काबिल दूल्हे की तलाश के रूप में प्रतियोगिता होती थी। जो लड़का बैल को वश में कर लेता था, उसी से लड़की की शादी होती थी।
इस खेल में बिना हथियार के मैदान में आना पड़ता था। इनका इरादा केवल बैल को काबू में करना होता था, उसे मारने का नहीं।
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क्या है जल्लीकट्टू खेल?
तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में फसलों की कटाई के समय बुलफाइट खेलने की परंपरा है। जिसमें हजारों लोग भाग लेने आते हैं।
खेल में एक लाल रंग के कपड़े में कुछ पैसे या सिक्के डालकर बैल के सींगों में बांधते हैं।
इस दाैरान बैल को बेकाबू करने के लिए शराब पिलाई जाती है, उसकी आंखों में मिर्च डाली जाती या उसकी पूंछ मरोड़ी जाती है।
खेल में सबसे अच्छा खेलने वाले आदमी और बैल को इनाम दिया जाता है।
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जल्लीकट्टू पर कानूनी विवाद
हर साल विवादों में रहने वाली तमिलनाडु की जल्लीकट्टू खेल परंपरा इसी महीने जनवरी में मनाई गई। तमिलनाडु सरकार ने तीन स्थानों पर इस खेल के आयोजन की अनुमति दी थी।
इस खेल पर रोक लगने की मांग सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थी। इसके खिलाफ राज्यभर में प्रदर्शन किए थे। कई स्थानों पर हिंसा होने की भी खबरें आई थीं।
बाद में सरकार ने इसके आयोजन के लिए अधिसूचना जारी कर दी थी और इसका आयोजन बहाल हुआ।