रोबोट की आंखों के संपर्क को पहचानता है बच्चों का दिमाग, अध्ययन में हुआ खुलासा
क्या है खबर?
आम तौर पर शिशु किसी भी भाषा को समझ सकते हैं। वे अपने मां-बाप द्वारा बोली जाने वाली भाषा को आसानी से समझ लेते हैं और इशारों को भी पहचान लेते हैं।
हालांकि, एक नए अध्ययन से एक बेहद चौकाने वाला खुलासा हुआ है। दरअसल, इस अध्ययन से सामने आया है कि नन्हें बच्चे यानि शिशु रोबोट की आंखों के संपर्क को भी पहचानता सकते हैं।
यह शोध बच्चों की देखभाल के लिहाज से अहम हो सकता है।
अध्ययन
आखिर क्यों किया गया था यह अध्ययन?
यह नया अध्ययन जर्नल बायोलॉजिकल साइकोलॉजी में प्रकाशित किया गया है। इसके मुताबिक, 6 से 8 महीने की उम्र वाले शिशुओं को पहले से ही आंखों के संपर्क के प्रभाव का एहसास होता है। वे न केवल मनुष्यों, बल्कि मानवीय रोबोट की आखों के इशारे भी समझ सकते हैं।
इस शोध का उद्देश्य यह समझना था कि शिशु प्रौद्योगिकी के साथ कैसे बातचीत करते हैं और उनके संपर्क में आने पर कैसे बरताव करते हैं।
प्रक्रिया
इस तरह से किया गया था यह अनोखा अध्ययन
इस अध्ययन को पूरा करने के लिए 114 शिशुओं को बुलाया गया था। सभी को 3 चीजों के सामने प्रस्तुत किया गया था, जिनमें एक मानव, नाओ नामक एक ह्यूमनॉइड रोबोट और एक गैर-मानवीय वस्तु यानि एक फूलदान शामिल थे।
शिशुओं को मानव और रोबोट की आखें दिखाई गईं, जिससे वह उनके इशारों को समझ सकें।
इस दौरान मानव और रोबोट शिशुओं को कभी सीढ़ी, तो कभी तिरछी निगाहों से देख रहे थे।
नतीजे
आखों में देखने के सामाजिक महत्व को समझते हैं शिशु
टाम्परे विश्वविद्यालय में डॉक्टरेट शोधकर्ता और मानव सूचना प्रसंस्करण प्रयोगशाला के सदस्य सामुली लिनुनसालो ने अपनी टीम के साथ मिलकर यह अध्ययन लिखा है।
उनका कहना है कि मानवों की आखों के समान ही शिशु रोबोट की आखों के इशारों को भी समझ पाते हैं। इसका मतलब है कि शिशु आखों में देखने के सामाजिक महत्व को समझते हैं।
साथ ही वे रोबोट और इंसानों की आखों के इशारों का मतलब भी पहचान लेते हैं।
अन्य अध्ययन
इंसानों की तुलना में रोबोट पर ज्यादा भरोसा करते हैं बच्चे
इससे पहले जून में एक अन्य अध्ययन किया गया था, जिससे सामने आया था कि बच्चे इंसानों की तुलना में रोबोट पर ज्यादा भरोसा करते हैं।
इतना ही नहीं, बच्चे रोबोट के गलतियां करने पर उनके प्रति सहानुभूति भी महसूस करते हैं। इस शोध में बच्चों को इंसानों और रोबोट से जुड़ी फिल्में दिखाई गई थीं।
अध्ययन से उजागर हुआ की छोटे बच्चों की तुलना में बड़े बच्चे रोबोट पर अधिक भरोसा दिखा रहे थे।