
आयुर्वेद के अनुसार दिन में सोना सही है या नहीं?
क्या है खबर?
कई लोग दोपहर में सोना पसंद करते हैं और धीरे-धीरे यह उनके लिए एक आदत बन जाती है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दोपहर के समय आपको इतनी नींद क्यों आती है? शायद नहीं।
कुछ लोग कहते हैं कि दिन के समय सोना मानव शरीर के लिए अच्छा है, जबकि कई लोगों के हिसाब से यह गलत है।
आइए जानते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार दिन में सोना सही है या नहीं।
आयुर्वेद
दोष हावी होने पर दिन में न सोएं
आयुर्वेद चिकित्सा की सबसे प्राचीन उपचार प्रणालियों में से एक है जिसके अनुसार व्यक्ति के शरीर में तीन दोष (वात, पित्त और कफ) होते हैं जिनसे मिलकर शरीर बनता है।
माना जाता है कि ये दोष पांच मूल तत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) से उत्पन्न होते हैं और लोग दिन में तब सोने से बचे, जब उनके दोष हावी न हो।
कफ दोष
सुबह 6 से 10 बजे के बीच सोने से बचे कफ दोष वाले लोग
कफ दोष सुबह 6 से 10 बजे के बीच हावी होता है और अगर आप इस समय सोते हैं तो आप आलस महसूस करेंगे और आपके आंतरिक अंग ठीक से और सुचारू रूप से काम नहीं करेंगे, जैसा उन्हें करना चाहिए।
इस दौरान आपका सक्रिय होना जरूरी है। इस समय एक्सरसाइज करना लाभकारी होता है।
आयुर्वेद के अनुसार दोपहर के समय हल्का खाना खाएं ताकि आपको नींद न आए।
पित्त दोष
पित्त दोष वालों को दिन के इस समय नहीं होना चाहिए
सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक पित्त हावी रहता है।
पित्त आग को संदर्भित करता है जो भोजन के पाचन को बढ़ाती है और अगर आप इस दौरान सो जाते हैं तो पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है।
साफ शब्दों में कहें तो इस समय आपका शरीर आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन को ऊर्जा और ईंधन में बदलने में सक्षम होता है जो बाकि समय में सहायक होता है। इसलिए इस समय सोने से बचें।
वात दोष
इस समय हावी होता है वात दोष
दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक वात हावी रहता है।
मानसिक और रचनात्मक गतिविधियों के लिए यह समय सबसे अच्छा है क्योंकि आपका मस्तिष्क बहुत प्रभावी ढंग से कार्य करता है।
लेकिन अगर आप इस दौरान सो जाते हैं तो इससे मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
इस समय उन चीजों को करना हमेशा बेहतर होता है जो आपको आराम और खुश महसूस कराते हैं।
जानकारी
आयुर्वेद के मुताबिक दिन में सोना है गलत
आयुर्वेद के अनुसार, दिन के समय सोना सही नहीं है क्योंकि इससे कफ, पित्त और वात दोष के बीच असंतुलन हो सकता है।
यह असंतुलन शरीर के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
लेकिन आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि जो लोग स्वस्थ और मजबूत हैं वे दिन में कुछ मिनट की झपकी ले सकते हैं, वो भी सिर्फ गर्मियों के दौरान।