इन 3 बीजों के संयोजन से पाचन में सुधार के साथ मिल सकते हैं कई लाभ
क्या है खबर?
भारतीय खाने में अजवाइन, जीरे और सौंफ का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि ये तीनों बीज कई पोषक तत्वों का भंडार हैं। इनका सेवन पाचन को सुधारने में मदद कर सकता है।
वैसे आजकल पाचन को ठीक रखने के लिए बाजार में कई दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन इन प्राकृतिक सामग्रियों का उनके मुकाबले में शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।
आइए जानते हैं कि खाने के बाद इन बीजों का संयोजन कैसे पाचन को सुधार सकता है।
लाभ
भोजन करने के बाद अजवाइन, जीरा और सौंफ क्यों खाना चाहिए?
ये तीनों बीज मिलकर एक शक्तिशाली पाचन बूस्टर बनाते हैं। इन सभी में कार्मिनेटिव गुण होते हैं, जो गैस की समस्या को दूर रखने और सूजन से राहत दिला सकते हैं।
अजवाइन में थाइमोल नामक खास तत्व होता है, जो पाचन की मांसपेशियों को आराम देने में मदद कर सकता है, जबकि जीरा पाचन एंजाइमों के उत्पादन को बढ़ाकर पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर कर सकता है।
सौंफ में मौजूद फाइबर कब्ज की समस्या से बचाए रख सकता है।
तरीका
कैसे करें इन बीजों का सेवन?
इन बीजों का सेवन एकसाथ करने के लिए एक जार में तीनों की बराबर मात्रा को डालें और उसे अच्छे से मिला लें।
इसके बाद रोजाना भोजन करने के बाद एक चम्मच इन मिश्रण को चबाएं।
इससे न केवल खाना आसानी से पच जाएगा, बल्कि इम्यूनिटी को मजबूत करने, सांसों की दुर्गन्ध दूर करने सहित कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।
यहां जानिए पाचन क्रिया के लिए लाभदायक एक्सरसाइज।
इस्तेमाल
क्या हर किसी के लिए सुरक्षित है इस संयोजन का सेवन?
वैसे तो जीरे, सौंफ और अजवाइन का संयोजन हर किसी के लिए लाभदायक है, लेकिन गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे अपनी डाइट में शामिल करें।
इसके अतिरिक्त इसके अत्यधिक सेवन से पेट खराब हो सकता है।
अगर आप लगातार पाचन समस्याओं का अनुभव कर रहे हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें ताकि जल्द से जल्द समस्या से निपटा जा सके।
विकल्प
पाचन के लिए लाभदायक अन्य विकल्प
अगर आपको जीरे, अजवाइन और सौंफ पसंद नहीं है तो अपने पाचन को बेहतर रखने के लिए आप इनकी जगह अपनी डाइट में इलायची को शामिल कर सकते हैं।
इसमें मौजूद वातनाशक गुण पाचन को सुधार सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, अदरक में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाचन क्रिया को स्वस्थ रख सकते हैं।
त्रिफला का सेवन भी पाचन के लिए फायदेमंद है। इसमें आमलकी, बिभीतकी और हरीतकी जैसी जड़ी बूटियों का संयोजन होता है।