
कोरोना मरीजों के लिए क्यों जरूरी है रेमडेसिवीर और देश में इसकी कमी क्यों?
क्या है खबर?
पिछले कुछ दिनों से कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में एंटी-वायरल दवा रेमडेसिवीर की भारी कमी महसूस की जा रही है।
कई जगहों पर इसके लिए लोगों को घंटो लाइन में खड़े होना पड़ रहा है। अधिक मांग होने के कारण भारत सरकार ने हाल ही में इसके निर्यात पर रोक लगाई थी।
आइये, जानते हैं कि रेमडेसिवीर की कमी क्यों पड़ रही है।
जरूरत
रेमडेसिवीर की जरूरत क्यों पड़ती है?
कोरोना महामारी फैलाने वाले वायरस के खिलाफ रेमडेसिवीर एक प्रभावी एंटी वायरल दवा है।
TOI के अनुसार, पिछले साल अक्टूबर में इसे अमेरिका में कोरोना के इलाज के इस्तेमाल करने की मंजूरी मिली थी। ऐसी मंजूरी पाने वाली यह पहली दवा थी।
इंजेक्शन के जरिये दी जाने वाली यह दवा कोरोना संक्रमितों को जल्द ठीक होने में मदद करती है। हालांकि, कई तरह के टेस्ट करने के बाद ही डॉक्टर मरीजों को इसके इस्तेमाल की सलाह देते हैं।
कमी
रेमडेसिवीर की कमी क्यों पड़ रही है?
इस दवा को बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि दिसंबर से मार्च के दौरान उन्होंने कोरोना को घटते मामलों को देखते हुए इसका उत्पादन बंद या बहुत कम कर दिया था।
उनका कहना है कि उन्हें इस बात की आशंका नहीं थी कि देश में इस तेजी से संक्रमितों की संख्या बढ़ने लगेगी।
कंपनियों का मानना है कि मांग के अनुरूप आपूर्ति होने में अभी कम से कम 10 दिनों का समय लग सकता है।
रेमडेसिवीर की कमी
कच्चे माल की कमी भी एक कारण
रेमडेसिवीर का उत्पादन करने वाली हेटेरो हेल्थकेयर के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रफुल्ल खासगीवाल ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि दिसंबर से फरवरी के बीच दवा की मांग नहीं थी। इसके चलते कंपनी ने उत्पादन को घटाकर क्षमता का 5-10 फीसदी कर दिया था। अब मांग बढ़ने के कारण मार्च से कंपनी ने उत्पादन बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि उनके पास कच्चे माल की कमी है, जिसे आने में थोड़ा समय लगेगा।
रेमडेसिवीर की कमी
कई कंपनियों ने बंद कर दिया था उत्पादन
सिप्ला को रेमडेसिवीर की आपूर्ति करने वाली कंपनी कमला लाइफसाइसेंस के मार्केटिंग डायरेक्टर डॉ डीजे जवर का कहना है कि मांग कम होने के कारण उन्होंने 31 दिसंबर से 1 मार्च के बीच उत्पादन रोक दिया था। इस बार रेमडेसिवीर की अभूतपूर्व मांग है, जो कंपनी पूरा नहीं कर पा रही है।
इस दवा का उत्पादन करने वाली बाकी कंपनियां भी कमी के पीछे सीमित या उत्पादन बंद होने को कारण बता रही हैं।
प्रक्रिया
बनने से लेकर अस्पताल पहुंचने में लगता है 20-25 दिन का समय
रेमडेसिवीर के उत्पादन में पांच दिन का समय लगता है। इसके बाद इसका स्टेर्लिटी टेस्ट किया जाता है, जिसमें 14 दिन लगते हैं।
पूरी तरह तैयार होने के बाद 2-8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर इसे दूसरे शहरों में पहुंचाने पर 2-3 दिन का समय लगता है। इस तरह उत्पादन से लेकर अस्पतालों में पहुंचने की प्रक्रिया 20-25 दिनों में पूरी होती है।
इसके अलावा कंपनियों को कोरोना की पाबंदियों के कारण कच्चा माल मिलने में भी देरी हो रही है।
जानकारी
तेजी से बढ़ते मामले भी एक कारण
उत्पादन बंद होने के अलावा कोरोना संक्रमितों की संख्या में एकदम आई तेजी भी रेमडेसिवीर की कमी का कारण है। देश में रोजाना रिकॉर्ड संख्या में मरीज मिल रहे हैं और सक्रिय मामले 13 लाख के करीब चले गए हैं।
रेमडेसिवीर की कमी
वितरण की व्यवस्था भी चरमराई
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि कोरोना की पहली लहर में केवल बड़े शहरों में ज्यादा मरीज मिल रहे थे, लेकिन इस बार संक्रमण छोटे शहरों और गांवों तक पैर पसार चुका है। इस वजह से वितरण की व्यवस्था भी चरमरा गई है और स्टॉक कम पड़ रहे हैं।
वहीं दवा कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बार मामले इतनी तेजी से बढ़े हैं कि कंपनियों को समय ही नहीं मिला।
रेमडेसिवीर
कमी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
भारत में सिप्ला, डॉ रेड्डीज लैबोरेट्री, हेटेरो लैब, जुबिलिएंट लाइफ साइंस, बायोकॉन की सिनजीन, जाइडस कैडिला और मायलन की भारतीय यूनिट रेमेडेसिवीर का उत्पादन कर रही है। सरकार ने अब इन सब कंपनियों से उत्पादन बढ़ाने को कहा है।
इसके अलावा सरकार ने रेमडेसिवीर इंजेक्शन और रेमडेसिवीर एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) के निर्यात पर देश में स्थिति स्थिर होने तक प्रतिबंध लगाया है।
सरकार ने इसकी कालाबाजारी को रोकने के लिए भी निर्देश जारी किए हैं।