
सरकार ने लगाया 20 रुपये से कम कीमत वाले लाइटर के आयात पर प्रतिबंध, जानें वजह
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने 20 रुपये से कम कीमत वाले सिगरेट लाइटर के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। बताया जा रहा है कि यह कदम लाइटर के आयात पर लगाम लगाने के इरादे से उठाया गया है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से एक अधिसूचना में कहा गया है कि सिगरेट लाइटर के आयात को 'मुक्त' से बदल कर 'प्रतिबंधित' श्रेणी में डाल दिया गया है।
आइए समझते हैं कि केंद्र ने ये फैसला क्यों लिया।
गणित
लाइटर के आयात-निर्यात का गणित
पॉकेट या गैस लाइटर का आयात बीते वित्त वर्ष 2022-23 में 6.6 लाख डॉलर (लगभग 5.41 करोड़ रुपये) का रहा। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल में यह 1.3 लाख डॉलर (1.06 करोड़ रुपये) का था। इनका आयात मुख्य रूप से स्पेन, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात से किया जाता है।
दूसरी ओर रिफिल करने योग्य लाइटर का आयात वित्त वर्ष 2021-22 में 70 लाख डॉलर (57.43 करोड़ रुपये) की तुलना में 2022-23 में 88 लाख डॉलर (72.20 करोड़ रुपये) रहा।
स्टालिन
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने की थी प्रतिबंध की अपील
पिछले साल सितंबर में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को एक पत्र लिखकर प्लास्टिक के सिंगल यूज सिगरेट लाइटर पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, ताकि माचिस उद्योग को बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने लिखा था, "माचिस उद्योग कृषि के लिए शुष्क क्षेत्र में आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण इंजन है। आप जानते होंगे कि माचिस उद्योग निर्यात के माध्यम से लगभग 400 करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा राजस्व अर्जित करता है।"
माचिस
माचिस उद्योग पर क्या असर पड़ रहा था?
घरेलू माचिस बाजार में चीन के सिंगल यूज प्लास्टिक सिगरेट लाइटर की वजह से गिरावट आ रही है थी। चीनी सिगरेट लाइटर 10 रुपये में उपलब्ध हैं और 20 माचिस डिब्बियों की जगह ले सकता है।
स्टालिन ने अपने पत्र में लिखा था कि कोरोना वायरस महामारी के बाद से उद्योग में निर्यात से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ी हैं और पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे देशों से माचिस उद्योग को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।
रोजगार
लाखों लोगों के रोजगार जाने का था खतरा
बता दें कि केवल तमिलनाडु में ही माचिस उद्योग से करीब एक लाख लोगों को रोजगार मिलता है। इनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं।
स्टालिन ने पत्र में लिखा था कि अगर लाइटर की बिक्री होती रही तो राज्य के करीब एक लाख लोगों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो सकता है।
रोजगार के साथ ही ये अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में इस्तेमाल होने वाली माचिस का हर तीसरा डिब्बा भारत में बनता है।
पर्यावरण
पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक है लाइटर
बता दें कि सिंगल यूज लाइटरों से भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा भी निकलता है, जिसका पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी को देखते हुए अंडमान और निकोबार प्रशासन ने 2019 में एक गजट अधिसूचना के माध्यम से सिंगल यूज लाइटर के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाइटरों का आयात करने के लिए सीमा शुल्क और ज्वलनशील पदार्थों को नियंत्रित करने वाले नियमों का भी उल्लंघन किया जा रहा था।