
क्या है अनुच्छेद 142, जिसका इस्तेमाल कर सुप्रीम कोर्ट ने पलटे चंडीगढ़ मेयर चुनाव के नतीजे?
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चंडीगढ़ मेयर चुनाव में धांधली पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए नतीजों को पलट दिया और आम आदमी पार्टी (AAP) उम्मीदवार कुलदीप कुमार को विजेता घोषित किया।
इसके अलावा कोर्ट ने दोषी पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश भी दिया।
आइए जानते हैं कि ये अनुच्छेद 142 क्या है और किन-किन मामलों में इसका इस्तेमाल हुआ।
अनुच्छेद
क्या है संविधान का अनुच्छेद 142?
संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए विशेष आदेश देने की शक्तियां प्रदान करता है।
अनुच्छेद के अनुसार, "सुप्रीम कोर्ट अपने अधिकार-क्षेत्र का प्रयोग करते हुए ऐसा हुक्मनामा या आदेश पारित कर सकता है, जो उसके सामने लंबित किसी मामले या विषय में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक हो।"
इस अधिकार का प्रयोग करते हुए दिया गया आदेश अन्य मामलों के लिए एक नजीर नहीं बन सकता।
अवधारणा
क्या है अनुच्छेद 142 के पीछे की अवधारणा?
अनुच्छेद 142 'न्याय, समता और अच्छे विवेक' की अवधारणा से लिया गया है। इसे किसी विशिष्ट कानून के अभाव में भारत में ब्रिटिश काल में 1935 में संघीय न्यायालयों में लागू किया गया था।
इस अनुच्छेद की शक्ति विवेकाधीन है। इसका मतलब है कि कोर्ट कानून की सख्त व्याख्या से परे जाकर और अपनी समझदारी और रचनात्मकता का उपयोग करके इसके जरिए विवादों को सुलझा सकता है।
इसे 27 मई, 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था।
शक्ति
क्या अनुच्छेद 142 की शक्तियां असीमित हैं?
नहीं, इसकी शक्ति असीमित नहीं है। संविधान के जानकारों का मानना है कि कोर्ट इसका उपयोग करते समय कुछ सिद्धांतों का पालन करता है, जिनमें न्यायिक संयम और न्यायिक सक्रियता प्रमुख है।
इस मतलब है कि कोर्ट इस इस्तेमाल में कानूनी संस्थाओं की शक्तियों का सम्मान करता है और किसी कानूनी प्रावधान को खत्म या उसकी अवहेलना नहीं कर सकता।
कोर्ट अक्सर सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने के लिए इस अनुच्छेद की शक्तियों का उपयोग करता है।
राम मंदिर
हाल ही में कोर्ट ने कब किया अनुच्छेद का इस्तेमाल?
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2019 में अयोध्या जमीन विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ विवादित जमीन को रामलला की माना था और राम मंदिर बनाने के लिए इसे ट्रस्ट को सौंपा था, लेकिन इसमें मुस्लिम पक्ष के साथ अन्याय होता नजर आ रहा था।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए सरकार को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन अलग से देने का आदेश जारी किया था।
अन्य मामले
और किन मामलों में अनुच्छेद का हुआ है इस्तेमाल?
सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी कई मामलों में अनुच्छेद 142 का प्रयोग कर चुकी है।
2022 में कोर्ट ने इसके जरिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में दोषी और 30 साल से उम्रकैद की सजा काट रहे एजी पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया था।
इससे पहले भोपाल गैस त्रासदी मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन कार्बाइड बनाम केंद्र सरकार मामले में पीड़ितों को मुआवजा प्रदान करने के लिए इसी अनुच्छेद से हस्तक्षेप किया था।
मामला
क्या था चंडीगढ़ मेयर चुनाव से संबंधित मामला?
30 जनवरी को चंडीगढ़ मेयर का चुनाव हुआ था। इसमें 20 वोट होने के बावजूद भी AAP-कांग्रेस का गठबंधन हार गया, वहीं 16 वोट होने पर भी भाजपा जीत गई थी।
ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह ने AAP-कांग्रेस गठबंधन के 8 वोटों पर खुद निशान बनाकर उन्हें अमान्य करार दे दिए थे।
इसी कारण सुप्रीम कोर्ट ने पुराने नतीजों को पलट दिया और 8 वोटों को वैध मानते हुए AAP उम्मीदवार को विजयी घोषित किया।