
केंद्रीय कैबिनेट ने महिला आरक्षण विधेयक को दी मंजूरी, विशेष सत्र में पेश होगा- रिपोर्ट
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में आज केंद्रीय कैबिनेट ने महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी दी। इसे संसद के विशेष सत्र में पेश किया जाएगा। NDTV ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है।
विशेष सत्र बुलाने के बाद से ही आशंका जताई जा रही थी कि सरकार सदन में कोई बड़ा विधेयक पेश कर सकती है।
इससे पहले सरकार ने 8 विधेयकों की सूची जारी की थी, लेकिन उसमें इस विधेयक का जिक्र नहीं था।
प्रावधान
विधेयक में क्या प्रावधान?
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, महिला आरक्षण विधेयक में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिये 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है।
ये सीटें रूटेशन के हिसाब से आरक्षित की जाएंगी और 15 साल बाद आरक्षण खत्म हो जाएगा।
महिला आरक्षण विधेयक एक संविधान संशोधन विधेयक है। यही कारण है कि इसे दो तिहाई बहुमत से पारित किया जाना जरूरी है। इसी वजह से ये विधेयक करीब 26 साल से लंबित है।
विधेयक
कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने उठाया था मुद्दा
रविवार को सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों ने केंद्र सरकार से विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पेश करने की मांग की थी।
भारत राष्ट्र समिति (BRS) प्रमुख और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने भी 15 सिंतबर को इस संबंध में प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था।
उन्होंने पत्र में कहा था, "यह मामला कई सालों से लंबित है और संसद के इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पारित होना चाहिए।"
इतिहास
क्या है विधेयक के पीछे की राजनीति?
देश में लगभग 6 महीने बाद लोकसभा चुनाव होने हैं। हालिया समय में देखा गया है कि महिलाओं ने जिस पार्टी का बड़े पैमाने पर समर्थन किया, वो आसानी से चुनाव जीतने में कामयाब रहा।
केंद्र में नरेंद्र मोदी से लेकर बिहार में नीतीश कुमार तक, इसके कई उदाहरण है। ये महिला वोटरों की बढ़ती निर्णायक भूमिका का संकेत है।
माना जा रहा है कि भाजपा महिला आरक्षण विधेयक को पारित करके इसी महिला वोटबैंक को साधना चाहती है।
आंकड़े
अभी लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की क्या स्थिति?
फिलहाल 542 सदस्यों वाली लोकसभा में 78 महिला सांसद हैं, वहीं राज्यसभा के कुल 224 सदस्यों में से 24 महिलाएं हैं।
दिसंबर, 2022 में जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक, देश के 19 राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम है।
छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा (14.44 प्रतिशत) महिला विधायक हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 13.70 प्रतिशत विधायक महिलाएं हैं।
भारत में केवल पश्चिम बंगाल ही ऐसा राज्य है, जिसकी मुख्यमंत्री एक महिला है।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
महिला आरक्षण विधेयक को पहली बार 12 सितंबर, 1996 को तत्कालीन देवेगौड़ा सरकार ने संसद में पेश किया था। हालांकि, सरकार भंग होने के कारण ये पारित नहीं हो सका।
इसके बाद 1997, 1998, 1999 और 2003 में इसे 4 बार पेश किया गया, लेकिन एक बार भी पारित नहीं हो पाया।
UPA सरकार ने 2008 में इसे पेश किया और काफी मशक्कत के बाद 2010 में ये राज्यसभा से पारित हो गया, लेकिन लोकसभा में पेश नहीं हो सका।