
देश में लंबित हैं मंदिर-मस्जिद विवाद के ये 10 मुकदमे, जानिए क्या है मौजूदा स्थिति
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (12 दिसंबर) को पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए किसी भी पूजा स्थल के स्वामित्व को चुनौती देने वाले नए मुकदमे दर्ज करने पर रोक लगा दी है।
CJI संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और केवी विश्वनाथन की विशेष पीठ ने यह आदेश दिया है।
इस बीच आइए देश में लंबित मंदिर-मस्जिद विवाद के मुकदमों और उनकी मौजूदा स्थिति पर नजर डाल लेते हैं।
अधिनियम
पूजा स्थल अधिनियम क्या है और कब बना?
इस अधिनियम को दिसंबर, 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस से ठीक एक साल पहले 1991 में बनाया गया था।
उस समय राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था। कांग्रेस की पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने इसे संसद में पेश किया था।
इसमें देशभर के पूजा स्थलों के धार्मिक स्वरूप को बदलने पर प्रतिबंध लगाया गया था और वो 15 अगस्त, 1947 को आजादी के समय जैसे थे, उन्हें उसी धार्मिक स्वरूप में रखने का प्रावधान किया गया है।
जानकारी
अयोध्या मामले को अधिनियम से रखा गया था बाहर
अयोध्या के बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद को पूजा स्थल अधिनियम से छूट दी गई थी और यह इसके दायरे में नहीं आया। इसी कारण यह मामला कोर्ट में चलता रहा और सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर, 2019 में राम मंदिर बनाने का फैसला सुना दिया।
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उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद विवाद
1991 में आदि विश्वेश्वर ने मुकदमा दायर कर मस्जिद के काशी विश्वनाथ मंदिर स्थल पर होने का दावा किया था। 2021 में 5 हिंदू महिलाओं ने याचिका दायर कर दी।
इस पर वाराणसी के जिला न्यायाधीश ने ASI सर्वेक्षण का आदेश दिया और 2023 में भक्तों द्वारा दायर मुकदमे की स्थिरता को बरकरार रखा।
जनवरी 2024 में अदालत ने पूजा की अनुमति देने के लिए उचित व्यवस्था का निर्देश दिया और 1991 के मुकदमे की स्थिरता को भी बरकरार रखा।
#2
मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद का विवाद
मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद हटाने की मांग करते हुए 2020 से कई मुकदमे दायर किए गए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि यह भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर बनाई गई थी।
मई 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सभी लंबित मुकदमों को अपने पास स्थानांतरित कर लिया।
अगस्त 2024 में हाई कोर्ट ने मुकदमों की स्थिरता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। उसके बाद मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट की शरण में चल रही है।
#3
लखनऊ में टीले वाली मस्जिद का विवाद
लखनऊ में साल 2013 में भगवान शेषनाग टीलेश्वर महादेव विराजमान के आठ भक्तों ने एक मुकदमा दायर कर लक्ष्मण टीला स्थित मस्जिद के सर्वेक्षण की थी। उनका दावा था कि मस्जिद का निर्माण औरंगजेब ने एक हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर किया था।
इस मुकदमे की स्वीकार्यता का मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित है। मस्जिद परिसर में श्रद्धालुओं को नमाज अदा करने की अनुमति देने के लिए निषेधाज्ञा मांगने वाला एक अन्य मुकदमा एक सिविल न्यायालय में लंबित है।
#4
उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद का विवाद
अधिवक्ता हरि शंकर जैन सहित 8 याचिकाकर्ताओं ने गत 19 नवंबर को मुकदमा दायर कर दावा किया था कि जामा मस्जिद का निर्माण श्री हरि हर मंदिर के अवशेषों पर किया था।
इस पर संभल सिविल न्यायाधीश ने सर्वेक्षण का आदेश दे दिया, जिससे हिंसा भड़क उठी।
29 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सर्वेक्षण आदेश को चुनौती देने वाला मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में सूचीबद्ध होने तक मुकदमे को आगे न बढ़ाने का आदेश दे दिया।
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राजस्थान के अजमेर स्थित दरगाह शरीफ का विवाद
हिंदू सेना प्रमुख विष्णु गुप्ता ने सितंबर 2024 में मुकदमा दायर कहा कि अजमेर शरीफ दरगाह स्थल पर भगवान शिव को समर्पित मंदिर होने के साक्ष्य हैं। सिविल न्यायाधीश ने 27 नवंबर को केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, ASI और दरगाह समिति को नोटिस दे दिया।
इसी तरह अखिल भारत हिंदू महासभा ने 2022 में मुकदमा दायर कर उत्तर प्रदेश के बदायूं में शम्सी जामा मस्जिद के शिव मंदिर पर होने का दावा किया। इस पर अभी बहस जारी है।
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जौनपुर की अटाला मस्जिद का विवाद
स्वराज वाहिनी एसोसिएशन ने मई 2024 में एक मुकदमा दायर कर दावा किया था कि मस्जिद की जगह प्राचीन काल में अटला देवी का मंदिर था।
इस पर कोर्ट ने सर्वेक्षण का आदेश दे दिया। जौनपुर जिला न्यायालय को सर्वेक्षण अधिकारी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए दायर याचिका पर 16 दिसंबर को सुनवाई होनी बाकी है।
इस मुकदमे के पंजीकरण को चुनौती देने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई है।
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मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला परिसर स्थित कमाल मौला मस्जिद का विवाद
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने 2022 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ASI के 2003 के आदेश को चुनौती दी, जिसमें मुसलमानों को भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी।
मार्च 2024 में हाई कोर्ट ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया। अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने परिसर के चरित्र को बदलने वाली खुदाई पर राेक लगा दी। ASI ने जुलाई में अपनी रिपोर्ट पेश कर परिसर में हिंदू मंदिर के साक्ष्य होना बता दिया।
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दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का विवाद
साल 2020 में भगवान विष्णु की ओर से एक मुकदमा दायर किया गया था जिसमें दिल्ली के महरौली में कुतुब मीनार परिसर के अंदर स्थित कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के अंदर हिंदू और जैन देवताओं की बहाली की मांग की गई थी।
दिल्ली सिविल जज ने 2021 में इस मुकदमे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के प्रावधानों द्वारा वर्जित है। इस आदेश को चुनौती एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के समक्ष लंबित है।
#10
कर्नाटक के मैंगलोर में मलाली जुमा मस्जिद का विवाद
विश्व हिंदू परिषद की ओर से साल 2022 में एक मुकदमा दायर किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद के जीर्णोद्धार के दौरान उसके नीचे एक मंदिर जैसी संरचना पाई गई थी। ऐसे में परिसर का सर्वेक्षण किया जाना चाहिए।
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए 31 जनवरी, 2024 को कर्नाटक हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया कि वह पहले मुकदमों की स्वीकार्यता पर निर्णय ले और उसके बाद आगे की कार्रवाई करे।